जानें कौनसा अन्न अर्पित करने और किस शिवलिंग की पूजा से महादेव होते हैं प्रसन्न
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भगवान भोलेनाथ धर्म की साक्षात मूर्ति है, कल्याणकारी हैं। शिव के विधिवत पूजन से जीवन में कभी भी दुःख की अनुभूति नहीं होती है। अनिष्टकारक दुर्योगों में शिवलिंग के अभिषेक मात्र से भगवान महाकालेश्वर तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। सभी ग्रहजन्य बाधाएं दूर हो जाती हैं,अपमृत्यु भाग जाती है और सभी प्रकार के सुखभोग प्राप्त हो जाते हैं। शिवलिंग के अर्चना से मनुष्य को भूमि, विद्या,पुत्र ,धन, निरोगी काया एवं सभी सुखो की प्राप्ति होती है। शिवपुराण में बताए अलग-अलग अनाज का चढ़ावा सुख-सौभाग्य व धन सहित कई मनचाहे फल देने वाला माना गया है।
- जौ द्वारा की हुई शिव की पूजा स्वर्गीय सुख की वृद्धि करने वाली है,ऐसा ऋषियों का कथन है।
- गेहूं के बने हुए पकवान से की हुई शंकर जी की पूजा निश्चय ही बहुत फलदायी मानी गई है। इससे संतान की वृद्धि होती है,संतान होनहार व सद्गगुणी कुल का गौरव बढ़ाने वाली निकलती है।
- मूंग से पूजा करने पर भगवान आशुतोष सभी सुख प्रदान करते हैं।
- प्रियंगु(कंगनी) द्वारा सर्वाध्यक्ष परमात्मा शिव का पूजन करने मात्र से उपासक के धर्म ,अर्थ और काम-भोग की वृद्धि होती है तथा वह पूजा समस्त सुखों को देने वाली होती है।
- राई से भोलेनाथ का पूजन करने से काम,क्रोध,लोभ एवं मोह रुपी शत्रुओं का विनाश होता है।
- अरहर के पत्तों से श्रृंगार करके भगवान शिव की पूजा करें। यह पूजा सभी प्रकार के सुखों और सम्पूर्ण फलों को देने वाली है।
चमत्कारी है पारद शिवलिंग
पारद शिवलिंग की पूजा को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इस समूचे ब्रह्माण्ड में सर्वोत्तम दिव्य वस्तु के रूप में पूजित रससिद्ध पारद शिवलिंग समस्त दैहिक,दैविक एवं भौतिक महादुखों से मुक्ति दिलाने वाला है। पारद शम्भुबीज है यानि पारद की उत्पत्ति महादेव के शरीर से उत्पन्न पदार्थ शुक्र से मानी गई है। इसलिए शास्त्रों में पारद को साक्षात शिव का रूप माना गया है और पारद लिंग का सबसे ज़्यादा महत्त्व बताकर उसे दिव्य बताया गया है।
शिवमहापुराण में शिवजी का कथन है कि करोड़ों शिवलिंगों के पूजन से जो फल प्राप्त होता है उससे भी करोड़ गुना अधिक फल पारद शिवलिंग की पूजा और उसके दर्शन मात्र से ही प्राप्त हो जाता है। जो मनुष्य पारद शिवलिंग की भक्ति पूर्वक पूजा-अभिषेक तथा दर्शन करता है,उसे तीनों लोकों में स्थित समस्त शिवलिंगों के पूजन का फल मिलता है एवं सौ अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर का फल प्राप्त होता है। यह सभी तरह के लौकिक तथा परलौकिक सुख देने वाला है। इस शिवलिंग का जहां पूजन होता है वहां साक्षात शंकर का वास होता है।
अन्य प्रकार के शिवलिंग