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Lohri 2020: लोहड़ी पर्व की खास बातें, पर्व से जुड़ी है ये रोचक कहानी

Mon, 13 Jan 2020 06:18 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 13 Jan 2020 06:18 AM IST
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Lohri 2020 know religious significance of the lohri, lohri story of dulla bhatti wala
लोहड़ी पर्व 2020

लोहड़ी पर्व उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है। हालांकि मूल रूप यह पंजाब का सांस्कृति पर्व है। लेकिन इस पर्व की व्यापकता इतनी अधिक है कि यह पूरे उत्तर भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रति वर्ष यह त्योहार मकर संक्रांति के एक या दो दिन पहले ही मनाया जाता है। इस वर्ष लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को है, जबकि मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। लोहड़ी के दिन आग में तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली चढ़ाई जाती हैं। आग के चारों तरफ चक्कर लगाकर सभी लोग अपने सुखी जीनव की कामना करते हैं। लोहड़ी की खास बात ये भी है कि इस पर्व में संगीत और नृत्य का तड़का इसे और भी खूबसूरत बना देता है।

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lohri - फोटो : अमर उजाला

क्यों मनाई जाती है लोहड़ी ?
पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुवाई और कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है। इस अवसर पर पंजाब में नई फसल की पूजा करने की परंपरा है। इसके अलावा कई हिस्सों में माना जाता है यह त्योहार पूस की आखिरी रात और माघ की पहली सुबह की कड़क ठंड को कम करने के लिए मनाया जाता है।

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lohri

कैसे मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार ?
लोहड़ी के इस पावन अवसर के दिन अग्नि जलाने के बाद उसमें तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली चढ़ाई जाती हैं। वहीं इसके बाद सभी लोग अग्नि के गोल-गोल चक्कर लगाते हुए सुंदरिए-मुंदरिए हो, ओ आ गई लोहड़ी वे, जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते इस पावन पर्व को उल्लास के साथ मनाते हैं।

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कौन था दुल्ला भट्टी ?
अमूमन लोहड़ी में लोग गीत गाते हुए दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए नाच गाना करते हैं। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का खास महत्व होता है। दरअसल, मुगल काल में अकबर के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब में ही रहता है। कहते हैं कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की उस वक्त रक्षा की थी जब संदल बार में लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था। वहीं एक दिन दुल्ला भट्टी ने इन्हीं अमीर सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई थी। और तभी से इसी तरह दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया जाने लगा और हर साल हर लोहड़ी पर ये कहानी सुनाई जाने लगी।

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कहां से आया लोहड़ी शब्द?
मान्यता है कि लोहड़ी शब्द 'लोई' यानी (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था, लेकिन कई लोग इसे तिलोड़ी से उत्पन्न हुआ भी मानते हैं, जो बाद में लोहड़ी शब्द हो गया। वहीं कुछ लोगों का ये भी मानना है कि यह शब्द 'लोह' यानी चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण से निकला है। 

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