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Kalashtami 2019 : काल भैरव की इस पूजा से पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं और बदल जाता है भाग्य

Tue, 25 Jun 2019 08:49 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Madhukar Mishra Updated Tue, 25 Jun 2019 08:49 AM IST
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know best remedies of kaal bhairav puja in hindi
काल भैरव की साधना-आराधना की पावन तिथि है कालाष्टमी। इस माह यह पावन तिथि 25 जून को पड़ रहा है। यदि आप जीवन में किसी बड़ी मुश्किल में हों या फिर आपको शत्रुओं का भय सता रहा हो तो आपके लिए भगवान भैरव की पूजा वरदान साबित हो सकती है। 
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काल भैरव के नाम उच्चारण, मंत्र जाप, स्तोत्र, आरती इत्यादि तत्काल प्रभाव मिलता है और मनुष्य की दैहिक, दैविक, भौतिक एवं आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। कलयुग में हनुमान जी के अतिरिक्त केवल काल भैरव जी की पूजा एवं उपासना का ही तत्काल प्रभाव बताया गया है, इसलिए हमें इनकी उपासना करके इन्हे प्रसन्न रखना चाहिए।
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भैरव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय —

— शत्रु या कार्य में आ रही किसी बाधा को दूर करने के लिए कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव को सवा सौ ग्राम काला तिल, सवा सौ ग्राम काली उड़द और सवा ग्यारह रुपये एक काले कपड़े में बांधकर भगवान भैरव को चढ़ाएं। इस उपाय को करने से शत्रुओं पर विजय और जीवन में छाया काला अंधकार दूर होता है।
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— यदि आप बाबा काल भैरव की कृपा चाहते है तो कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव के मंदिर में जाकर उनकी प्रतिमा पर सिंदूर और तेल चढ़ाए और मूर्ति के सामने बैठकर काल भैरव मंत्र का जाप करें।

— कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव को नींबू की माला या सिर्फ 5 नींबू चढ़ाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कालाष्टमी पर किए गए इस उपाय से भैरव भक्त को जीवन में अपार धन, यश और सफलता प्राप्त होती है। 

— शास्त्रों में कुत्ते को भगवान काल भैरव का वाहन बताया गया है। भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं। यदि काला कुत्ता उपलब्ध न हो तो किसी भी कुत्ते को खिलाकर यह उपाय कर सकते हैं। इस उपाय को करने से न सिर्फ भगवान भैरव बल्कि शनिदेव की भी कृपा बरसेगी। 


— काल भैरव शिव के तामसी रूप हैं इसलिए इन्हें प्रसाद स्वरूप मदिरा चढ़ाया जाता है। कहीं-कहीं कालभैरव को दूध चढ़ाने का भी विधान है। जो लोग मदिरा का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें दूध से ही कालभैरव की पूजा करनी चाहिए। कालष्टमी की पूजा-व्रत करने वाले साधक को फलाहार करना चाहिए। 

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