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Karwa Chaut Pooja Vidhi: शिव संग करें गौरी की पूजा, जानें मंत्र, विधि और महत्व
Wed, 16 Oct 2019 08:17 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 16 Oct 2019 08:17 AM IST
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karwa chauth
17 अक्तूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाएं रखती है। इस व्रत में महिलाएं सुबह से रात तक बिना कुछ खाए पूजा- पाठ, भजन और कथा सुनती हैं। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं सज संवर कर रात को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत तोड़ती हैं। इससे पहले भगवान शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा करती हैं। करव चौथ में सुहागिन महिलाएं मां पार्वती के स्वरूप गौरी की पूजा करके अपने सुहाग की लंबी आयु और सुखद कामना के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। करवा चौथ के दिन पूजा कैसे करनी चाहिए और किन मंत्रों का उच्चारण करें जानते हैं सभी के बारे में....
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गौरी माता की स्वरूप हैं चौथ माता
चौथ माता मां गौरी का ही स्वरूप हैं। करवा चौथ के दिन चौथ माता के साथ भगवान श्री गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-आराधना की जाती है और अंत में चौथ माता से सुहाग की रक्षा के लिए उनका आशीर्वाद प्रात्त करती हैं।
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पूजन विधि
सांयकाल में भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कर्तिकेय,गणेश एवं चंद्रमा का विधिपूर्वक पूजन करते हुए नैवेद्य अर्पित करें। अर्पण के समय यह कहना चाहिए कि ''भगवान कपर्दी गणेश मुझ पर प्रसन्न हों।''और रात्रि के समय चंद्रमा का दर्शन करके यह मंत्र पढते हुए अर्घ्य दें, मंत्र है- ''सौम्यरूप महाभाग मंत्रराज द्विजोत्तम, मम पूर्वकृतं पापं औषधीश क्षमस्व मे।'' अर्थात हे! मन को शीतलता पहुंचाने वाले, सौम्य स्वभाव वाले ब्राह्मणों में श्रेष्ठ, सभी मंत्रों एवं औषधियों के स्वामी चंद्रमा मेरे द्वारा पूर्व के जन्मों में किए गए पापों को क्षमा करें। मेरे परिवार में सुख शांति का वास रहे। मां पार्वती उन सभी महिलाओं को सदा सुहागन होने का वरदान देती हैं, जो पूर्णतः समर्पण और श्रद्धा विश्वास के साथ यह व्रत करती हैं।
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शिव मंत्र
नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।।
चंद्रमा को अर्घ्य का मुहूर्त: 17 अक्टूबर की रात्रि में 7:58 बजे के बाद अर्घ्य दें।