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26 अप्रैल को कालाष्टमी, जानिए महत्व और पूजा के नियम, भूलकर भी ना करें इस दिन ये काम

Tue, 23 Apr 2019 11:12 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 23 Apr 2019 11:12 AM IST
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kalashtami vrat puja tips during kalashtami fast 2019
kalashtami 2019
काल भैरव को भगवान शिव का अवतार माना गया है। 26 अप्रैल को कालाष्टमी मनाई जाएगी। कालाष्टमी पर काल भैरव की उपासना की जाती है। मान्यता के अनुसार जो भक्त कालाष्टमी के दिन भैरव बाबा की पूजा करता है उसके मन से भय और भूत-पिशाच का डर दूर हो जाता है। कालभैरव अष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से सभी प्रकार के टोने-टोटके से मुक्ति मिल जाती है। शास्त्रों में कालाष्टमी के दिन उपवास और पूजा-पाठ के दौरान कुछ विशेष सावधानियां रखने को कहा गया है।  
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उपवास के नियम
- कालाष्टमी व्रत में साधक को उपवास के दौरान सभी नियमों का पालन करना चाहिए।

- कालाष्टमी के दिन असत्य वचन और तीखी भाषा बोलने से बचना चाहिए।

- काल भैरव को प्रसन्न के लिए व्रत के दौरान केवल फलाहार का सेवन करना चाहिए।

- कालाष्टमीव्रत में किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए।

- इस दिन अपने बड़े बुजुर्गो का आशाीर्वाद जरूर लेना चाहिए।

- सौम्य पूजा के लिए इस दिन बटुक भैरव की पूजा करना चाहिए।

- काल भैरव की पूजा करते समय भगवान शिव संग माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए।

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भैरव साधना का महत्व

- शिव पुराण में कहा है कि  काल भैरव शंकर के ही रूप हैं और कालाष्टमी के दिन पूजा से घर में नकारत्मक ऊर्जा, जादू-टोने, भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता। 

- कालभैरव भगवान शिव के अंश होने के कारण भैरव अष्टमी पर बाबा भैरव की पूजा करने से सारे कष्ट मिट जाते है और जाने -अनजाने में हुए सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है।
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- ऐसी मान्यता है काल भैरव की पूजा करने और व्रत रखने से सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है साथ ही भूत पिशाच का कभी डर नहीं रहता है। इस दिन काल भैरव को खुश करने के लिए काले कुत्ते को रोटी जरूर खिलानी चाहिए।

- यदि आप बाबा काल भैरव की कृपा चाहते है तो अष्टमी के दिन बाबा कालभैरव के मंदिर में जाकर उनकी प्रतिमा पर सिंदूर और तेल चढ़ाए और मूर्ति के सामने बैठकर काल भैरव मंत्र का जाप करें।

- बाबा कालभैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के अंश के रूप में हुई थी इसलिए इस दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। ऐसा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।


- भैरव आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होती है। व्यक्ति में साहस का संचार होता है. इनकी आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है, रविवार और मंगलवार के दिन इनकी पूजा बहुत फलदायी है

- भैरव जी का बहुत महत्व है यह दिशाओं के रक्षक और काशी के संरक्षक कहे जाते हैं। काल भैरव की शरण में जाने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

- ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति काशी में मृत्यु को प्राप्त करता है उसके पापो का भोग कालभैरव सोटे से पीटकर पूरा करते हैं। इस क्रिया को भैरव यातना कहा जाता है। 
   
 
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