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Kalashtami 2020: 13 जून को कालाष्टमी व्रत, व्रत कथा को सुनकर मिलता है पुण्यफल

Sat, 13 Jun 2020 07:14 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 13 Jun 2020 07:14 AM IST
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Kalashtami 2020 vrat katha of kalashtami
कालाष्टमी व्रत 2020 - फोटो : Social Media

इस महीने की 13 तारीख को कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है। कालाष्टमी पर भगवान शिव के अवतार काल भैरव की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कालाष्टमी के दिन व्रत रखने और भैरवनाथ की आराधना करने से शुभ फल मिलते हैं। लेकिन इस व्रत का फल तभी प्राप्त होता है जब व्रती कालाष्टमी व्रत कथा को सुनता है। इस दिन पूजन करने वाले सभी भक्तों को भैरव बाबा की कथा जरूर सुननी चाहिए। यह कथा इस प्रकार है :- 

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पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि एकबार एक बार भगवान विष्णु जी और ब्रह्मा जी के बीच यह बहस हो गयी कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। यह विवाद इतना बढ़ गया कि सभी देवतागण घबरा गए कि अब प्रलय होने वाला है। इस विकट समस्या का समाधान पाने के लिए सभी देवगण भगवान शिव के पास पहुंचे। तब भगवान शिव ने एक सभा का आयोजन किया और भगवान शिव ने इस सभा में सभी ज्ञानी, ऋषि-मुनि, सिद्ध महात्माओं को आमंत्रित किया। इसके साथ ही साथ ही इस सभा में विष्णु जी और ब्रह्मा जी सम्मिलित हुए।

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सभा में लिए गए निर्णय को भगवान विष्णु जी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया, लेकिन ब्रह्मा जी फैसले से संतुष्ट नहीं हुए और वे महादेव का अपमान करने लगे। ब्रह्माजी ने भगवान शिव की निंदा की जिसके चलते भगवान शिव क्रोधित हो गए। तब भोलेनाथ ने अपने रौद्र रूप से काल भैरव को अवतरित किया। काल भैरव ने भगवान के अपमान का बदला लेने के लिए अपने नाखून से ब्रह्माजी के उस सिर को काट दिया जिससे उन्होंने भगवान शिव की निंदा की थी। इस कारण से उन पर ब्रह्रा हत्या का पाप लग गया।

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ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शंकर ने काल भैरव को पृथ्वी पर जाकर प्रायश्चित करने को कहा और बताया कि जब ब्रह्रमा जी का कटा हुआ सिर हाथ से गिर जाएगा तब जाकर तुम्हें ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी। अंत में जाकर काशी में काल भैरव की यात्रा समाप्त हुई थी। फिर यहीं पर वे स्थापित हो गए और काशी के कोतवाल बन गए।

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