Kajari Teej 2025: कजरी तीज की पूजा के लिए यहां पढ़ें शिव-पार्वती की संपूर्ण आरती
Kajari Teej 2025: इस बार 12 अगस्त 2025 को कजरी तीज है। इस तिथि पर पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र और सुकर्माण योग का संयोग बना हुआ है। साथ ही सुबह 11 बजकर 59 मिनट से 12:51 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है। इस अवधि में शिव-पार्वती की आरती और उपासना से सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।
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Kajari Teej 2025: कजरी तीज हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे कजली या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं प्रेम जीवन सुखमय और पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत करती हैं। इसके अलावा कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए यह पर्व मनाती हैं। मान्यता है कि 108 बार जन्म लेने के बाद माता पार्वती शंकर जी से विवाह करने में सफल हुई थी। तभी से इस त्योहार को निस्वार्थ प्रेम, सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिव जी को जल और माता पार्वती को श्रृंगार अर्पित करने से शादी में आ रही दिक्कतें, रिश्तों में दरार और कर्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इस बार 12 अगस्त 2025 को कजरी तीज है। इस तिथि पर पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र और सुकर्माण योग का संयोग बना हुआ है। साथ ही सुबह 11 बजकर 59 मिनट से 12:51 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है। इस अवधि में शिव-पार्वती की आरती और उपासना से सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:23 से 05:06 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:38 से 03:31 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:03 से 07:25 बजे तक
निशीथ काल मुहूर्त: रात 12:05 से 12:48 बजे तक
शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।