Kajari Teej Vrat Katha: कजरी तीज व्रत आज, पूजा के दौरान जरूर पढ़ें ये व्रत कथा
Kajari Teej Vrat Katha: कजरी तीज के दिन मां पार्वती और शिव जी की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन पूजा के दौरान कजरी तीज की व्रत कथा का श्रवण या पाठन जरूर करना चाहिए। तभी पूजा पूर्ण मानी जाती है।
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Kajari Teej Vrat Katha: भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है। इस साल कजरी तीज का त्योहार 2 सितंबर 2023 को है। यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। कजरी तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां पार्वती और शिव जी की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति के साथ सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। इस दिन पूजा के दौरान कजरी तीज की व्रत कथा का श्रवण या पाठन जरूर करना चाहिए। तभी पूजा पूर्ण मानी जाती है। कजरी तीज की व्रत कथा इस प्रकार है...
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कजरी तीज व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार एक गांव में एक ब्राह्मण रहता था जो बहुत गरीब था। उसके साथ उसकी पत्नी ब्राह्मणी भी रहती थी। ब्राह्मण की पत्नी ने भाद्रपद महीने की कजली तीज का व्रत किया। उसने अपने पति यानी ब्राह्मण से कहा कि उसने तीज माता का व्रत रखा है। उसे चने का सत्तू चाहिए, कहीं से ले आओ। ब्राह्मण ने ब्राह्मणी को बोला कि वो सत्तू कहां से लाएगा। इस पर ब्राह्मणी ने कहा कि उसे सत्तू चाहिए फिर चाहे वो चोरी करे या डाका डाले। लेकिन उसके लिए सत्तू लेकर आए।
रात का समय था। ब्राह्मण घर से निकलकर साहूकार की दुकान में घुस गया। उसने साहूकार की दुकान से चने की दाल, घी, शक्कर लिया और सवा किलो तोल लिया। फिर इन सब से सत्तू बना लिया। जैसे ही वो जाने लगा वैसे ही आवाज सुनकर दुकान के सभी नौकर जाग गए। सभी जोर-जोर से चोर-चोर चिल्लाने लगे।
इतने में ही साहूकार आया और ब्राह्मण को पकड़ लिया। ब्राह्मण ने कहा कि वो चोर नहीं है। वो एक एक गरीब ब्राह्मण है। उसकी पत्नी ने तीज माता का व्रत किया है, इसलिए सिर्फ यह सवा किलो का सत्तू बनाकर ले जाने आया था। जब साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली तो उसके पास से सत्तू के अलावा और कुछ नहीं मिला।
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उधर चांद निकल गया था और ब्राह्मणी सत्तू का इंतजार कर रही थी। साहूकार ने ब्राह्मण से कहा कि आज से वो उसकी पत्नी को अपनी धर्म बहन मानेगा। उसने ब्राह्मण को सत्तू, गहने, रुपए, मेहंदी, लच्छा और बहुत सारा धन देकर दुकान से विदा कर दिया। फिर सबने मिलकर कजली माता की पूजा की। जिस तरह से ब्राह्मण के दिन सुखमय हो गए ठीक वैसे ही कजली माता की कृपा सब पर बनी रहे।