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आषाढ़ का महीना हुआ आरंभ, इस महीने दो ग्रहण के साथ होंगे ये प्रमुख त्योहार
Sun, 07 Jun 2020 08:19 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 07 Jun 2020 08:19 AM IST
सार
- 15 जून को सूर्य वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा।
- 22 जून से गुप्त नवरात्रि शुरू हो जाएंगे।
- आषाढ़ के महीने में सूर्य ग्रहण पड़ेगा।
- 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
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इस आषाढ़ के महीने में भड़ल्या नवमी, देवशयनी एकादशी, गुप्त नवरात्र, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा जैसे व्रत-त्योहार हैं।
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विस्तार
6 जून से हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ का महीना आरंभ हो चुका है। धार्मिक नजरिए से यह महीना काफी अहम होता है। इस माह कई प्रमुख व्रत-त्योहार आते हैं। जिनका काफी महत्व होता है। इस महीने दो ग्रहण भी लगेगा। 21 जून को सूर्य ग्रहण होगा जिसे भारत में देखा जा सकेगा। वहीं 5 जुलाई को पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण भी लगेगा। इस आषाढ़ के महीने में भड़ल्या नवमी, देवशयनी एकादशी, गुप्त नवरात्र, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा जैसे व्रत-त्योहार हैं।
मिथुन संक्रांति
15 जून को सूर्य वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। मिथुन संक्रांति है। इस दिन सूर्य पूजा, गंगा स्नान और दान का महत्व होता है।
योगिनी एकादशी
महीने की दूसरी एकादशी 17 जून को है। इस व्रत को करने से कई तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है।
सूर्य ग्रहण
5 जून को हुए चंद्र ग्रहण के बाद आषाढ़ के महीने में सूर्य ग्रहण पड़ेगा। यह ग्रहण ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर होगा। यह सूर्य ग्रहण होगा जो भारत में देखा जा सकेगा। ग्रहण दिखाई देने के कारण इसमें सूतककाल लगेगा। सूतक 20 जून की रात 10.14 बजे से शुरू होगा। ग्रहण के बाद घर और मंदिर में गंगाजल से छिड़काव और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।
गुप्त नवरात्रि
नवरात्रि में देवी के नौ रूप की आराधना की जाती है। 22 जून से गुप्त नवरात्रि शुरू हो जाएंगे। तांत्रिक क्रिया के लिए गुप्त नवरात्रि किया जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा
विश्व प्रसिद्ध उड़ीसा के पुरी का भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आषाढ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से निकाली जाती है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा से पहले स्नान की प्रक्रिया की गई। जिसमें मंदिर के गर्भ गृह से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुबद्रा की प्रतिमाओं को निकालकर 108 घड़ों के सुगंधित जल से स्नान कराया गया। इसके बाद भगवान 15 दिनों के लिए एकांतवास यानी क्वारैंटाइन में रहेंगे।
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देवशयनी एकादशी
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु शयन करने के लिए क्षीरसागर में चले जाते हैं। जिस कारण से इस दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसी दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा। 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
भड़ल्या नवमी
भड़ल्या नवमी को अबूझ मुहूर्त कहते हैं। इस दिन बिना कोई मुहूर्त देखे सभी तरह के शुभ कार्य कर सकते हैं। इस बार यह 29 जून को भड़ल्या नवमी आएगी।
गुरु पूर्णिमा
5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण लगेगा। यह भी 5 जून की तरह उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। ये चंद्र ग्रहण नहीं दिखेगा इसलिए इसका महत्व नहीं है।
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मिथुन संक्रांति
15 जून को सूर्य वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। मिथुन संक्रांति है। इस दिन सूर्य पूजा, गंगा स्नान और दान का महत्व होता है।
योगिनी एकादशी
महीने की दूसरी एकादशी 17 जून को है। इस व्रत को करने से कई तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है।
सूर्य ग्रहण
5 जून को हुए चंद्र ग्रहण के बाद आषाढ़ के महीने में सूर्य ग्रहण पड़ेगा। यह ग्रहण ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर होगा। यह सूर्य ग्रहण होगा जो भारत में देखा जा सकेगा। ग्रहण दिखाई देने के कारण इसमें सूतककाल लगेगा। सूतक 20 जून की रात 10.14 बजे से शुरू होगा। ग्रहण के बाद घर और मंदिर में गंगाजल से छिड़काव और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।
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गुप्त नवरात्रि
नवरात्रि में देवी के नौ रूप की आराधना की जाती है। 22 जून से गुप्त नवरात्रि शुरू हो जाएंगे। तांत्रिक क्रिया के लिए गुप्त नवरात्रि किया जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा
विश्व प्रसिद्ध उड़ीसा के पुरी का भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आषाढ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से निकाली जाती है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा से पहले स्नान की प्रक्रिया की गई। जिसमें मंदिर के गर्भ गृह से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुबद्रा की प्रतिमाओं को निकालकर 108 घड़ों के सुगंधित जल से स्नान कराया गया। इसके बाद भगवान 15 दिनों के लिए एकांतवास यानी क्वारैंटाइन में रहेंगे।
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देवशयनी एकादशी
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु शयन करने के लिए क्षीरसागर में चले जाते हैं। जिस कारण से इस दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसी दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा। 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
भड़ल्या नवमी
भड़ल्या नवमी को अबूझ मुहूर्त कहते हैं। इस दिन बिना कोई मुहूर्त देखे सभी तरह के शुभ कार्य कर सकते हैं। इस बार यह 29 जून को भड़ल्या नवमी आएगी।
गुरु पूर्णिमा
5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण लगेगा। यह भी 5 जून की तरह उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। ये चंद्र ग्रहण नहीं दिखेगा इसलिए इसका महत्व नहीं है।