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Holika Dahan 2026: नई दुल्हन को क्यों नहीं देखना चाहिए जलती हुई होली? जानें क्या है धार्मिक कारण
Sat, 28 Feb 2026 07:22 PM IST
Shweta Singh
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shweta Singh
Updated Sat, 28 Feb 2026 07:22 PM IST
सार
Who Should Avoid Holika Dahan: होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पवित्र अग्नि से निकलने वाली ऊर्जा सभी के लिए शुभ नहीं मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवविवाहित महिलाओं को होलिका की अग्नि के दर्शन नहीं करने चाहिए।
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holika dahan 2026
- फोटो : amar ujala
विस्तार
Kin Logo Ko Nahin Dekhna Chahiye Holika Dahan: होली का त्योहार खुशी और रंगों का एक खूबसूरत मेल है। इस साल होली 03 मार्च को मनाई जाएगी। होलिका दहन के समय भद्रा का साया माना जा रहा है। ऐसे में होलिका के दर्शन और उसकी पूजा करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पवित्र अग्नि से निकलने वाली ऊर्जा सभी के लिए शुभ नहीं मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवविवाहित महिलाओं को होलिका की अग्नि के दर्शन नहीं करने चाहिए। आइए जानते हैं की नवविवाहित महिलाओं के आलावा और कौन कौन लोग हैं जिन्हें होलिका की अग्नि के दर्शन नहीं करने चाहिए।
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नवविवाहित महिलाएं
पारंपरिक तौर पर नवविवाहित महिला के लिए शादी के बाद अपनी पहली होली के दौरान अपने ससुराल में होलिका दहन देखना अशुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं की मानें होलिका प्रतीक है हिरण्यकश्यप की बहन का। कुछ मान्यताओं के अनुसार जलती हुई होलिका को देखने से नई शादीशुदा ज़िंदगी में कलह,गलतफहमियां या दुर्भाग्य आ सकता है। अगर दुल्हन पहली होली अपने मायके में मनाए और होलिका की अग्नि से दूर रहे, तो उसके नए वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
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गर्भवती महिला
शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा रहता है । ऐसा माना जाता है कि इसका प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है।
सास और बहू एक साथ
सास और बहू का होलिका दहन एक साथ देखना अशुभ माना जाता है। आम तौर पर माना जाता है कि ऐसा करने से उनके रिश्ते में तनाव या कड़वाहट आ सकती है।
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नई-नवेली दुल्हन अपनी पहली होली पर अपने मायके क्यों जाती है?\
जैसा कि पहले बताया गया है, ऐसा माना जाता है कि शादी के पहले साल होलिका की अग्नि न देखने से दुल्हन के वैवाहिक जीवन में शांति और भविष्य में खुशहाली बनी रहती है।शादी के बाद पहली होली खास मानी जाती है। अपने मायके जाने से दुल्हन अपने परिवार के साथ आराम से होली मना सकती है। इससे रिश्ते मजबूत होते हैं और पुरानी रीति रिवाजों का सम्मान होता है ।
होलिका दहन से जुड़ी एक लोक कथा के अनुसार, जिस दिन होलिका आग में जली थी, उसी दिन उसकी शादी इलोजी नाम के व्यक्ति से होनी थी। होलिका अग्नि में ही जलकर मर गई थी। जबकि उसे आग से बचाने का वरदान मिला था। जब इलोजी की मां शादी से पहले होलिका को देखने के लिए गई तो उसने होलिका की चिता देखी और सदमे से भर गई। जलते हुए देखने के बाद वह बेहोश हो गई या दुख से मर गई। तब से यह माना जाने लगा कि होलिका को देखना नवविवाहिताओं के लिए अशुभ है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।