{"_id":"58ba9cb04f1c1b214e8325aa","slug":"holi-special-holika-dahan-aur-holi-poojan-ka-muhrat-and-vidhi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जानें होली पूजन और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
जानें होली पूजन और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
amarujala.com- Presented by: आकांक्षा सिंह
Updated Fri, 10 Mar 2017 01:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
होलिका दहन पर पूजा करने वालों के लिए इस बार का मुहूर्त इस प्रकार से हैं। जाने मुहूर्त का सटीक समय
-होली 13 मार्च को है, जबकि होलिका दहन 12 मार्च को हैं। पूजन मुहूर्त इस प्रकार रहेगा।
द्रिकपंचाग के अनुसार 12 मार्च को होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6:43 से लेकर 8: 23 तक रहेगा। इस एक घंटे 39 मिनट के समय में लोग पूजा कर सकते हैं। इसमें 4:11 से लेकर 5:23 तक भाद्र पंच और 5: 23 से 7:23 तक भाद्र मुखा रहेगा। इससे पहले 11 मार्च को शाम 8:23 से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन होलिका दहन की समाप्ति यानी शाम 8: 23 तक रहेगी।
विज्ञापन
-होली 13 मार्च को है, जबकि होलिका दहन 12 मार्च को हैं। पूजन मुहूर्त इस प्रकार रहेगा।
द्रिकपंचाग के अनुसार 12 मार्च को होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6:43 से लेकर 8: 23 तक रहेगा। इस एक घंटे 39 मिनट के समय में लोग पूजा कर सकते हैं। इसमें 4:11 से लेकर 5:23 तक भाद्र पंच और 5: 23 से 7:23 तक भाद्र मुखा रहेगा। इससे पहले 11 मार्च को शाम 8:23 से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन होलिका दहन की समाप्ति यानी शाम 8: 23 तक रहेगी।
आगे जानें होली का पूजन का मुहूर्त
होली पूजन का मुहूर्त-
होलिका दहन के स्थान को जल छिड़क कर शुद्ध करके उसमें सूखी लकड़ी डालें, फिर होली के समीप जाक शुभासन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें और तीन प्रदक्षिणा करके प्रार्थना करें और शीतल जल छिड़कें। फिर खेड़ा खांडा को होली में डालें तथा जौ, गेहूं की बाली और चने के झाड़ को होली की ज्वाला से सेकें। होली की अग्नि भस्म तथा भस्म लेकर घर आएं। वहां आकर वास स्थान में गोबर से चौका लगा अन्नादि की स्थापना करें। बाजे-गाजे सहित हास्य शब्द उच्चारें और गुड़ के बने पकवान बालकों को खाने के लिए दें। इस से ढूंढा के दोष शांत हो जाते हैं और सुख-शांति मिलती है।
होलिका दहन के स्थान को जल छिड़क कर शुद्ध करके उसमें सूखी लकड़ी डालें, फिर होली के समीप जाक शुभासन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें और तीन प्रदक्षिणा करके प्रार्थना करें और शीतल जल छिड़कें। फिर खेड़ा खांडा को होली में डालें तथा जौ, गेहूं की बाली और चने के झाड़ को होली की ज्वाला से सेकें। होली की अग्नि भस्म तथा भस्म लेकर घर आएं। वहां आकर वास स्थान में गोबर से चौका लगा अन्नादि की स्थापना करें। बाजे-गाजे सहित हास्य शब्द उच्चारें और गुड़ के बने पकवान बालकों को खाने के लिए दें। इस से ढूंढा के दोष शांत हो जाते हैं और सुख-शांति मिलती है।