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Jagannath Yatra 2024: जगन्नाथ रथ यात्रा में क्यों सोने की झाड़ू से की जाती है सफाई, जानें इसके पीछे की कहानी

Thu, 04 Jul 2024 06:00 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शिखर बरनवाल Updated Thu, 04 Jul 2024 06:00 PM IST
सार

जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान एक अनोखी परंपरा है, सोने की झाड़ू से रथ यात्रा के मार्ग की सफाई करना। आइए इस लेख में जानते हैं कि जगन्नाथ यात्रा में सोने की झाड़ू से सफाई करने का क्या धार्मिक सांस्कृतिक महत्व है।
 

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history and old story of golden broom during Jagannath Rath Yatra in hindi
जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : PTI

विस्तार

Jagannath Yatra 2024: हिंदू धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा, जो भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक यात्रा का उत्सव है, भारत के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। इस यात्रा के दौरान, भगवान की मूर्तियों को भव्य रथों में सजाकर शहर की गलियों में घुमाया जाता है। इस यात्रा की एक अनोखी परंपरा है सोने की झाड़ू से रथ यात्रा के मार्ग की सफाई करना। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व दोनों हैं। मान्यताओं के अनुसार जब से जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत हुई है तब से ही राजाओं के वंशज पारंपरिक रूप से रथ यात्रा के सामने झाड़ू लगाते हैं। इस झाड़ू की खास बात ये होती है कि ये कोई सामान्य झाड़ू नहीं होती है बल्कि ये एक सोने के हत्थे वाली झाड़ू होती है। जिसे सोने के झाड़ू के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद मंत्र उच्चारण और जयघोष के साथ इस पवित्र रथ यात्रा की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इस नियम का पालन करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए इस लेख में जानते हैं कि जगन्नाथ यात्रा में सोने की झाड़ू से सफाई करने का क्या धार्मिक सांस्कृतिक महत्व है।

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धार्मिक महत्व:

  • सोना एक पवित्र धातु माना जाता है और इसका उपयोग भगवानों और देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है। सोने की झाड़ू से सफाई करके, भक्त रथ यात्रा के मार्ग को पवित्र करते हैं और भगवान के आगमन के लिए तैयार करते हैं।
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  • सोने की झाड़ू से सफाई करना भक्तों की भगवान जगन्नाथ के प्रति समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि वे भगवान के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ अर्पण करना चाहते हैं।
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  • सोने को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सोने की झाड़ू से सफाई करने से उस क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और भक्तों को आशीर्वाद मिलता है।


सांस्कृतिक महत्व:

  • सोने की झाड़ू से सफाई करना जगन्नाथ रथ यात्रा की भव्यता और राजसी स्वरूप को दर्शाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और यह इस त्योहार के समृद्ध इतिहास और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • सोने की झाड़ू से सफाई अक्सर एक सामुदायिक प्रयास होता है। भक्त रथ यात्रा के मार्ग की सफाई के लिए एक साथ आते हैं, जो एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है।
  • सोने की झाड़ू से सफाई जगन्नाथ रथ यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण है। यह दृश्य देखने लायक होता है और पर्यटकों को इस अनोखी परंपरा का अनुभव करने का अवसर मिलता है।


जगन्नाथ रथ यात्रा में सोने की झाड़ू से सफाई केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह धार्मिक महत्व, सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक भावना का प्रतीक है। यह भक्तों की भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्ति और समर्पण को दर्शाता है और इस त्योहार को और भी अधिक विशेष बनाता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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