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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Hariyali Teej 2025 Puja Vidhi Know Why Do Women 16 sringaar Importance

Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज कल, महिलाएं क्यों करती हैं सोलह श्रृंगार ? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र

Sat, 26 Jul 2025 05:42 PM IST
विनोद शुक्ला दिव्या आचार्य
दिव्या आचार्य Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 26 Jul 2025 05:42 PM IST
सार

हरियाली तीज सौभाग्य, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। कहा जाता है कि तीज के पर्व पर जो स्त्री सोलह शृंगार कर गृहलक्ष्मी का रूप धारण करती है, उसके परिवार में हर तरह की सुख-समृद्धि आती है।

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Hariyali Teej 2025 Puja Vidhi Know Why Do Women 16 sringaar Importance
Hariyali Teej 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय संस्कृति में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और व्रत-त्योहारों का जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है। हमारे पूर्वजों ने इन पर्वों को जनजीवन से जोड़कर उन्हें नियमित रूप से मनाने की परंपरा बनाई, ताकि जीवन में सुख-शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो सके। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरियाली तीज स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन जो विवाहित महिलाएं विधिपूर्वक व्रत करती हैं और सोलह शृंगार कर देवी स्वरूप में पूजन करती हैं, उन्हें सौभाग्य की संजीवनी शक्ति प्राप्त होती है। मान्यता है कि संस्कारवान स्त्री जब सोलह शृंगार से युक्त होती है तो उसे सोलह प्रकार के सांसारिक और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होते हैं। धर्मग्रंथों में स्त्री को शृंगार के बिना अधूरा बताया गया है। हरियाली तीज पर किया गया पूजन लक्ष्मी, ऋद्धि और सिद्धि के स्थायी वास का कारण बनता है।
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दिव्य सुंदरता का उत्सव
सोलह शृंगार की प्रथा का प्रारंभ कामदेव और रति के काल से माना जाता है। कहा जाता है कि युवावस्था में रति रूपवती नहीं थीं, इसलिए दुखी रहती थीं। रति को कोई पसंद भी नहीं करता था, इसलिए उन्होंने देवी लक्ष्मी की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। तब देवी महालक्ष्मी ने रति को सोलह शृंगार का महत्व बताकर आशीर्वाद दिया और बताया कि जो भी स्त्री सोलह शृंगार से युक्त होकर सजेगी-संवरेगी, उसे सौभाग्य की प्राप्ति होगी। तभी से विवाह आदि उत्सव और तीज-त्योहार पर प्रत्येक स्त्रियां सोलह शृंगार करती आ रही हैं। 
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ऋग्वेद में वर्णन है कि सोलह शृंगार न केवल स्त्री को सौंदर्य प्रदान करता है, बल्कि उसके सौभाग्य को बढ़ाता है, इसलिए नई-नवेली दुल्हन और सुहागिन महिलाएं भाग्य वृद्धि के लिए तीज आदि सुअवसरों पर सोलह शृंगार करती हैं। सोलह शृंगार सौंदर्य बढ़ाने के साथ विभिन्न दोषों को भी दूर करता है, जिससे जीवन में संपन्नता आती है। प्रत्येक आभूषण, जिसे सोलह शृंगार में स्त्रियां धारण करती हैं, उसका विशिष्ट महत्व है।

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सिर से पांव तक
तीज पर्व पर सिर से पांव तक सोलह शृंगार कर तीज माता के रूप में मां पार्वती का पूजन महिलाओं के जीवन में वरदान की भांति कार्य करता है। माथे की बिंदी से लेकर पैर की पायल तक जो सोलह शृंगार धारण किया जाता है, उसके धार्मिक और वैज्ञानिक, दोनों महत्व हैं। तीज पर पति की दीर्घायु एवं सुखी जीवन के लिए प्रत्येक विवाहित स्त्री को सोलह शृंगार अवश्य करना चाहिए। पहला शृंगार बिंदी, दूसरा सिंदूर, तीसरा काजल, चौथा मेहंदी, पांचवां शादी का जोड़ा, छठा गजरा, सातवां मांग टीका, आठवां नथ, नवां कर्णफूल, दसवां हार या मंगलसूत्र, ग्यारहवां बाजूबंद, बारहवां कंगन और चूड़ियां, तेरहवां अंगूठी, चौदहवां कमरबंद, पंद्रहवां बिछुआ और सोलहवां शृंगार पायल है।

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क्या कहता है विज्ञान
माथे पर बिंदी

बिंदी लगाने से आज्ञा चक्र ऊर्जावान होता है। बिंदी का दबाव मन को सबल बनाता है। 
मांग में सिंदूर
मांग में सिंदूर इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि यह स्थान ब्रह्मरंध्र के ठीक ऊपर है, जो एकाग्रता में वृद्धि करता है।
आंखों में काजल
काजल लगाने से बुरी नजर प्रभावहीन हो जाती है। तीज-त्योहार पर मेंहदी लगाने से उसका रंग जितना गहरा होता है, पति-पत्नी के बीच प्रेम उतना ही गहरा होता है। 
गले में मंगलसूत्र
मंगलसूत्र अमंगल की आशंकाओं से स्त्री के सुहाग की रक्षा करता है। 
नाक में नथ
नाक में नथ और कान में कर्णफूल पहनने से इन पर पड़ने वाला दबाव एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर पॉइंट की भांति कार्य करता है। 

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, धातु अथवा रत्नजड़ित अंगूठी धारण करने से ये पर्वत सबल होकर ग्रहों को नियंत्रित करते हैं। हाथ में चूड़ियां पहनने से धातुओं के गुण शरीर में कुशलता से प्रवेश करते हैं। इस प्रकार सोलह शृंगार के अंतर्गत बाजूबंद, कमरबंद, पायल, बिछुआ आदि आभूषण धारण करने से इनकी धातुओं का प्रभाव शरीर पर पड़ने के कारण स्वास्थ्य लाभ मिलता है। 

सोलह शृंगार से युक्त विवाहित स्त्री को देवी लक्ष्मी का स्वरूप मानकर गृहलक्ष्मी माना जाता है। सोलह शृंगार धारण कर जो स्त्रियां तीज पर्व के दिन व्रत को विधि-विधान एवं नियमपूर्वक करती हैं, उन्हें पुण्य प्राप्त होता है और घर में लक्ष्मी का निवास एवं पति की लंबी आयु होती है।

तीज के दो रूप
सावन मास में शुक्ल पक्ष की तीज को हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है, हरियाली तीज को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। कुछ लोग इसे छोटी तीज कहते हैं तो कहीं यह मधुश्रवा तीज या सुकृत तीज कहलाती है। भादों मास में शुक्ल पक्ष की हरितालिका तीज भी स्त्रियों का प्रमुख त्योहार है। तीज चाहे कोई भी हो, इसका परम उद्देश्य है- सुहाग, संतान की मंगलकामना और घर-परिवार में सुख-समृद्धि।


 
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