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Hanuman Jayanti 2025: हनुमानजी के पास मौजूद अष्ट सिद्धियों को क्यों माना जाता है चमत्कारी? जानें इसके बारे में
Sat, 12 Apr 2025 07:51 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 12 Apr 2025 07:51 AM IST
सार
12 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता जानकी ने उन्हें अष्ट सिद्धियों और नव निधियों का वरदान दिया था।
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12 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव का पर्व
- फोटो : adobe stock
विस्तार
श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी को हिंदू धर्म में केवल एक वीर योद्धा नहीं, बल्कि चमत्कारी सिद्धियों के स्वामी के रूप में भी पूजा जाता है। 12 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता जानकी ने उन्हें अष्ट सिद्धियों और नव निधियों का वरदान दिया था। हनुमान चालीसा की चौपाई "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन्ह जानकी माता" इस विशेषता का संकेत देती है। यहां हम जानेंगे उन आठ सिद्धियों के बारे में जो हनुमान जी को प्राप्त हैं और जिनके प्रभाव से उन्होंने असंभव कार्यों को संभव किया।
1. अणिमा
यह सिद्धि व्यक्ति को इतना सूक्ष्म बना देती है कि वह किसी की दृष्टि में आए बिना कहीं भी पहुंच सकता है। हनुमान जी ने इसी शक्ति का उपयोग कर लंका में प्रवेश किया और अशोक वाटिका में माता सीता से गुप्त रूप में भेंट की।
2. महिमा
इस सिद्धि से कोई भी अपना आकार अत्यंत विशाल कर सकता है। समुद्र पार करते समय जब सुरसा ने मार्ग रोका, तब हनुमान जी ने इसी शक्ति से अपना रूप सौ योजन लंबा कर लिया था।
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3. गरिमा
यह शक्ति व्यक्ति को भारी से भारी रूप धारण करने की क्षमता देती है। कहा जाता है कि महाभारत काल में हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप लेकर अपनी पूंछ फैलाकर भीम का घमंड तोड़ा था—वह पूंछ भीम चाहकर भी नहीं उठा सके।
4. लघिमा
इस सिद्धि से शरीर अत्यंत हल्का हो जाता है और व्यक्ति पलभर में कहीं भी गति कर सकता है। हनुमान जी ने लंका में गुप्त प्रवेश करते समय इस शक्ति का प्रयोग किया और पत्तों के बीच छिपे रहकर सीता माता से संवाद किया।
5. प्राप्ति
यह शक्ति किसी भी वस्तु, जानकारी या स्थान की तत्काल प्राप्ति का सामर्थ्य देती है। सीता माता की खोज करते समय हनुमान जी ने पशु-पक्षियों की भाषा समझकर मार्गदर्शन प्राप्त किया और अशोक वाटिका तक पहुंचे।
इस शक्ति से व्यक्ति अपनी इच्छा से जल, आकाश या पाताल में विचरण कर सकता है और लंबे समय तक जीवन बनाए रख सकता है। हनुमान जी ने राम से पहली भेंट ब्राह्मण रूप में इसी सिद्धि के सहारे की थी।
7. ईशित्व
यह शक्ति नेतृत्व, नियंत्रण और पुनर्जीवन की क्षमता देती है। रामायण में हनुमान जी वानर सेना के श्रेष्ठ सेनापति के रूप में उभरे और उनका नेतृत्व अद्वितीय रहा।
इस सिद्धि से मन और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त होता है। हनुमान जी अपने संयम, साधना और ब्रह्मचर्य से इस सिद्धि के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। उनके तेज और प्रभाव से विरोधी भी उनकी आज्ञा का पालन करने को बाध्य हो जाते थे।
हनुमान जी की ये अष्ट सिद्धियां न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आस्था और शक्ति का प्रतीक भी हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी भक्ति करता है, उसे भी जीवन में सफलता और चमत्कारी सहयोग प्राप्त होता है।
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1. अणिमा
यह सिद्धि व्यक्ति को इतना सूक्ष्म बना देती है कि वह किसी की दृष्टि में आए बिना कहीं भी पहुंच सकता है। हनुमान जी ने इसी शक्ति का उपयोग कर लंका में प्रवेश किया और अशोक वाटिका में माता सीता से गुप्त रूप में भेंट की।
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2. महिमा
इस सिद्धि से कोई भी अपना आकार अत्यंत विशाल कर सकता है। समुद्र पार करते समय जब सुरसा ने मार्ग रोका, तब हनुमान जी ने इसी शक्ति से अपना रूप सौ योजन लंबा कर लिया था।
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3. गरिमा
यह शक्ति व्यक्ति को भारी से भारी रूप धारण करने की क्षमता देती है। कहा जाता है कि महाभारत काल में हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप लेकर अपनी पूंछ फैलाकर भीम का घमंड तोड़ा था—वह पूंछ भीम चाहकर भी नहीं उठा सके।
4. लघिमा
इस सिद्धि से शरीर अत्यंत हल्का हो जाता है और व्यक्ति पलभर में कहीं भी गति कर सकता है। हनुमान जी ने लंका में गुप्त प्रवेश करते समय इस शक्ति का प्रयोग किया और पत्तों के बीच छिपे रहकर सीता माता से संवाद किया।
5. प्राप्ति
यह शक्ति किसी भी वस्तु, जानकारी या स्थान की तत्काल प्राप्ति का सामर्थ्य देती है। सीता माता की खोज करते समय हनुमान जी ने पशु-पक्षियों की भाषा समझकर मार्गदर्शन प्राप्त किया और अशोक वाटिका तक पहुंचे।
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6. प्राकाम्यइस शक्ति से व्यक्ति अपनी इच्छा से जल, आकाश या पाताल में विचरण कर सकता है और लंबे समय तक जीवन बनाए रख सकता है। हनुमान जी ने राम से पहली भेंट ब्राह्मण रूप में इसी सिद्धि के सहारे की थी।
7. ईशित्व
यह शक्ति नेतृत्व, नियंत्रण और पुनर्जीवन की क्षमता देती है। रामायण में हनुमान जी वानर सेना के श्रेष्ठ सेनापति के रूप में उभरे और उनका नेतृत्व अद्वितीय रहा।
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8. वशित्वइस सिद्धि से मन और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त होता है। हनुमान जी अपने संयम, साधना और ब्रह्मचर्य से इस सिद्धि के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। उनके तेज और प्रभाव से विरोधी भी उनकी आज्ञा का पालन करने को बाध्य हो जाते थे।
हनुमान जी की ये अष्ट सिद्धियां न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आस्था और शक्ति का प्रतीक भी हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी भक्ति करता है, उसे भी जीवन में सफलता और चमत्कारी सहयोग प्राप्त होता है।