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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Govardhan 2021 goverdhan ji ki aarti in hindi govardhan puja significance mahatv

Govardhan Puja 2021: गोवर्धन पूजा आज, जानिए गोवर्धन पूजा का महत्व और गोवर्धन महाराज की ये आरती

Fri, 05 Nov 2021 08:30 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 05 Nov 2021 08:30 AM IST
सार

कार्तिक मास की प्रतिपदा को मनाया जाने वाले पर्व गोवर्धन पूजा का सीधा संबंध प्रकृति और मनुष्य जाति से है। गोवर्धन पर्व 5 नवंबर यानि आज मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत का पूजन करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं।  गोवर्धन पूजा करने वाले लोगों को गोवर्धन की कथा जरूरी सुननी चाहिए। साथ ही पूजा के समय गोवर्धन महाराज की यह आरती भी जरूरी करना चाहिए। आइए जानते हैं गोवर्धन महाराज की आरती। 

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Govardhan 2021 goverdhan ji ki aarti in hindi govardhan puja significance mahatv
गोवर्धन की पूजा करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कार्तिक मास की प्रतिपदा को मनाया जाने वाले पर्व गोवर्धन पूजा का सीधा संबंध प्रकृति और मनुष्य जाति से है। गोवर्धन पर्व 5 नवंबर यानि आज मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत का पूजन करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं।  गोवर्धन पूजा करने वाले लोगों को गोवर्धन की कथा जरूरी सुननी चाहिए। साथ ही पूजा के समय गोवर्धन महाराज की यह आरती भी जरूरी करना चाहिए। आइए जानते हैं गोवर्धन माहराज की आरती। 

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गोवर्धन पूजा का महत्व 

गोवर्धन पूजा का पर्व  भगवान श्री कृष्ण द्वारा इन्द्र देव को हराने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। इस दिन गेहूं, चावल, बेसन से बनी कढ़ी और पत्ते वाली सब्जियों का भोजन बनाया जाता है। ये पकवान श्री कृष्ण को अर्पित किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से घर में धन, संतान और गौ रस की वृद्धि होती है। गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगाने का भी बड़ा महत्व बताया जाता है। मान्यता है कि इनकी परिक्रमा करने से भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं।
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गोवर्धन महाराज की आरती

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े ( जय हो )
तोपे चढ़े ( जय हो )
तोपे चढ़े दूध की धार, हो धार,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरे कानन कुंडल साज रहे,
तेरे कानन कुंडल साज रहे,
ठोड़ी पे ( जय हो )
ठोड़ी पे ( जय हो )
ठोड़ी पे हीरा लाल, हो लाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरी झांकी ( जय हो )
तेरी झांकी ( जय हो )
तेरी झांकी बनी विशाल, हो विशाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरी सात कोस की परिक्रमा,
तेरी सात कोस की परिक्रमा,
और चकले ( जय हो )
और चकले ( जय हो )
और चकलेश्वर विश्राम, विश्राम,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

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