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Ganga Dussehra 2020: गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी व्रत से समझिए पानी का महत्व

Fri, 29 May 2020 07:50 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 29 May 2020 07:50 AM IST
सार

  • 1 जून को गंगा दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा।
  • गंगा दशहरा पर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वीलोक में आईं थीं।

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ganga dussehra 2020 and nirjala ekadashi vrat importance of water in jyestha month
गंगा दशहरा 2020

विस्तार

हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा और एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी की त्योहार मनाया जाता है। यह दोनों व्रत ज्येष्ठ माह में पानी के महत्व पर बल देते हैं। ज्येष्ठ के माह में गर्मी अपने चरम पर होती है। इसी महीने नौतपा भी आरंभ हो जाता है जिसमें नौ दिनों तक विकराल रूप से गर्मी पड़ती है। ऐसे में इस महीने में जल का महत्व काफी बढ़ जाता है। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी व्रत में जल के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है। ज्येष्ठ के महीने में जल की पूजा और दान का महत्व काफी बढ़ जाता है। एक दिन के अंतर में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है।
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1 जून 2020 - गंगा दशहरा
गंगा दशहरा पर मां गंगा का विधिवत रूप से पूजन किया जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। पुराणों में गंगा नदी को ज्येष्ठ भी कहा गया है।  स्कन्द पुराण में गंगा के बारे में कहा गया है कि सत्ययुग में ध्यान के द्वारा, त्रेतायुग में ध्यान और तप के माध्यम से, द्वापर में ध्यान, तप तथा यज्ञ के द्वारा मोक्ष की प्राप्ति होती थी, परन्तु कलियुग में तो केवल गंगा ही मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। गंगा दशहरा पर ही मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वीलोक में आईं थीं।
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02 जून- निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी जैसे नाम से ही प्रतीत होता है कि इस एकादशी में बिना पानी पिए पूरे दिन व्रत रखा जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है क्योंकि महाभारत काल में सबसे पहले भीम ने इस व्रत को किया था। निर्जला एकादशी जल के महत्व के बारे में बताती है। इसमें जल पिलाने और दान करने की परंपरा होती है। एकादशी स्वयं विष्णु प्रिया हैं। इसलिए इस दिन जप-तप पूजा पाठ करने से प्राणी श्रीविष्णु का सानिध्य प्राप्त कर जीवन-मरण के बन्धन से मुक्त हो जाता है । इस व्रत को'देवव्रत' भी कहा जाता है क्योंकि सभी देवता, दानव, नाग, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर, नवग्रह आदि अपनी रक्षा और श्रीविष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं। 

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