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Ganesh Chaturthi 2020: 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी, गणेशजी के इन 12 नामों को जपने से मिलती है बड़ी सफलता
Tue, 18 Aug 2020 02:09 PM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 18 Aug 2020 02:09 PM IST
सार
- सृष्टि में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का श्री सिद्धिविनायक नामधारी का जन्मदिन 22 अगस्त शनिवार को है।
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Ganesh Chaturthi 2020
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Ganesh Chaturthi 2020: सृष्टि में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का श्री सिद्धिविनायक नामधारी का जन्मदिन 22 अगस्त शनिवार को है। इस दिन इनकी पूजा आराधना करने से प्राणियों के कार्यों में आ रही विघ्न बाधाएं शांत हो जाती हैं। गणेश जी के श्रेष्ठ मंत्रों में इनके द्वादशनामाक्षर की चर्चा सर्वाधिक रहती है जो इस प्रकार श्लोकबद्ध हैं।
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सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः।
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः । द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ।
विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा । संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ।।
अर्थात- सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र तथा गजानन। इन नामों को जो विद्या आरंभ करने से पूर्व, विवाह के समय, गृह प्रवेश करते समय, संग्राम में या संकट के समय जो श्री गणेश के इन बारह नामों का जप या पाठ करते हैं उनके जीवन में किसी प्रकार की कोई विघ्न नहीं आने पाती। इनके इन बारह नामों का संछिप्त महत्व और प्रभाव इस प्रकार है।
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- सुमुख- भगवान गणेश जी के मुख पर करोड़ों सूर्य के समान तेज है जिनमें चंद्रमा की संपूर्ण कलाएं विद्यमान है अतः उनके मुख की शोभा का मूर्तिमान नाम सुमुख से संबोधित किया गया।
- एकदंत- इनके दूसरे नाम एकदंत में कई तरह की पौराणिक घटनाएं आती हैं जिनमें परशुराम के संघर्ष की घटना सर्वाधिक मिलती है। परशुराम जी ने अपने फरसे के प्रहार से गणेशजी के एक दांत का बिच्छेद कर दिया जिसके कारण इनका एकदंत नाम पड़ा जो ब्रह्म की एकरूपता का प्रतीक है।
- कपिल- इनका तीसरा नाम कपिल है जो एक कपिला गाय के एक रंग का प्रतीक है। गायों में सभी तेंतीस करोड़ देवी देवताओं का वास है। इनके इस पवित्र नाम का उच्चारण करने से सभी देवताओं की स्तुति हो जाती है, ऐसा शास्त्र मत है।
- गजकर्ण- गणेश जी का चौथा नाम गजकर्ण अर्थात जिनके कान हाथी के कान के समान हो, जिनका तात्पर्य है अति धीर गंभीर और सूक्ष्म बुद्धि वाला, सबकी सुनने वाला होता है इनकी आराधना से प्राणियों में यही गुण आ जाते हैं।
- लंबोदर- इनका पांचवा नाम लंबोदर है जो यह संकेत देता है दूसरों की कही गई भली बुरी बातों को अपने अंदर ही रखें उसे सार्वजनिक ना करें। अन्यथा उपहास का पात्र बन सकता है।
- विकट- गणेश जी का छठा नाम विकट कहा गया है जिसका अर्थ होता है भयंकर। इस नाम से हमें यह शिक्षा मिलती है की दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना चाहिए। गणेश जी अपने भक्तों को वरदान और दुष्टों को दंड देते हैं।
- विघ्ननाशक- इनका सातवां नामविघ्ननाशक है अर्थात अपने भक्तों के कार्य में आ रही सभी बाधाओं एवं विघ्नों का नाश करने वाले हैं।
- विनायक- जबकि आठवां नाम विनायक है जिसका तात्पर्य है सभी नायकों के स्वामी। विनायक की कृपा से व्यक्ति समाज के सर्वोच्च पद पर आसीन होता है। उसके नेतृत्व शक्ति की शत्रु भी सराहना करते हैं। भगवान शंकर ने इनका नामकरण करते हुए कहा था कि हे पार्वती ! यह कुमार मुझ नायक के बिना ही उत्पन्न होकर पुत्र बना है अतः इसका नाम 'विनायक' ही संसार में विख्यात होगा।
- धूम्रकेतु- इनका नवम नाम धूम्रकेतु है जिसका अर्थ है सफलताओं का परचम लहराने वाला अर्थात गणेश के धूम्रकेतु नाम के स्मरण मात्र से ही प्राणी अपने सफलताओं के चरम पर होता है। जहां भी जाता है लोग उसी का अनुसरण करने लगते हैं।
- गणाध्यक्ष- जबकि इनका दसवां नाम गणाध्यक्ष है जिसका तात्पर्य है सभी गणों के स्वामी अर्थात श्रेष्ठों के भी श्रेष्ठ, इनकी कृपा से कार्य व्यापार में उन्नति और नौकरी में पदोन्नति मिलती है।
- भालचंद्र- जबकि ग्यारहवां वा नाम भालचंद्र है अर्थात जिनके मस्तक पर भालचंद्र हों। चंद्रमा विराट पुरुष के मन से उत्पन्न हुए हैं, अतः इनकी आराधना से प्राणियों का मन मस्तिष्क एकाग्र रहता है वह जितेन्द्रिय होकर संसार में पूजित होता है।
- गजानन- इनका बारहवां नाम गजानन है जिसका तात्पर्य है, लंबे चौड़े कान गर्दन वाला, जिनमें ग्रहण करने की पूर्ण क्षमता हो। इनके सभी बारह नामों का जाप करने से नामों के अनुसार कहे गए फल भी शीघ्रता से प्राप्त होते हैं अतः यह द्वादशनामक्षर मंत्र गणेश की पूजा अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।
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