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Eid Mubarak 2018: भारत में इस समय दिख सकता है चांद और मनाई जाएगी ईद
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 14 Jun 2018 05:02 PM IST
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ईद इस्लाम धर्म का पवित्र त्योहार होता है। मान्यता के अनुसार रमजान के महीने में ही पवित्र कुरान इस धरती पर अवतरित हुई थी। रमजान के आखिरी दिन रोजे खत्म होने पर ईद मनाई जाती है। रमजान महीने में रोजा रख इबादत के बाद अल्लाह ने अपने बंदों को एक तोहफा दिया है। जिसके ईद उल फितर कहते हैं। रमजान के महीने के आखिरी दिन जब चांद का दीदार होता है तो उसके अगले दिन ईद मनाई जाती हैं। लोग इस मौके पर एक दूसरे को ईद की बधाईंया देने के साथ ही अल्लाह का शुक्रिया भी अदा करते हैं। इस साल ईद 15 या 16 मई को मनाई जाएगी। अगर 14 जून की रात को भारत में चांद दिखाई देता है ईद 15 जून को मनाई जाएगी वहीं अगर चांद 16 जून को दिखाई देगा तो ईद 16 जून को मनाई जाएगी।
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ईद क्यों मनाई जाती है
-हिजरी कैलेण्डर के अनुसार ईद साल में दो बार आती है। एक ईद होती है ईद-उल-फितर और दूसरी ईद-उल-जुहा। ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है, जबकि ईद-उल-जुहा को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है।
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- रमजान में रोजेदार पूरे महीने अल्लाह की इबादत करने के साथ पूरी तरह से संयम बरते हुए रोजे रखते हैं। आखिर रोजे के बाद चांद के दीदार होने के साथ रोजे रखने की ताकत देने के लिए इस दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं।
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- फितर को अरबी भाषा में फितरा कहा जाता है, जिसका मतलब एक दान होता है। दान या जकात किए बिना ईद की नमाज नहीं होती। कहते हैं कि ईद की नमाज से जरूरमंद लोगों को दान दिया जाता है।माना जाता है कि रमजान के महीने की 27वीं रात, जिसे शब-ए-क़द्र को कहा जाता है। जिस दिन कुरान का नुजुल यानी अवतरण हुआ था।
- मस्जिदों में मुलमान फितरा यानि की जान व माल का सदका करते है। सदका अल्लाह ने गरीबों की इमदाद का एक तरीका दिया है। गरीब आदमी भी इस दिन साफ कपड़े पहनकर सबके साथ मिलकर नमाज पढ़ते हैं।
- रमजान में मुस्लिमों के द्वारा रोजा,तरावीह और तिलावते कुरआन के जरिए विशेष इबादत की जाती हैं। रमजान का पवित्र महीना मुसलमानों की जीवन शैली में संतुलन बनाने का अच्छा जरिया होता है।