Durga Puja 2024 Date: कब से शुरू होगा दुर्गा पूजा का उत्सव? जानें महत्व और पौराणिक कथा
दुर्गा पूजा उत्सव, जिसे दुर्गोत्सव भी कहा जाता है, बहुत प्रसिद्ध है। इस त्योहार का उत्साह पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा देखा जाता है। यह पर्व मुख्यतः 05 दिनों तक चलता है जिसमें अलग-अलग दिन अलग-अलग उत्सव मनाये जाते हैं।
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Durga Puja Date Time Muhurat: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का बहुत महत्व है। नवरात्रि का त्योहार 9 दिनों तक मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने की परंपरा है। नवरात्रि पर दुर्गा पूजा मनाई जाती है। दुर्गा पूजा उत्सव, जिसे दुर्गोत्सव भी कहा जाता है, बहुत प्रसिद्ध है। इस त्योहार का उत्साह पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा देखा जाता है। यह पर्व मुख्यतः 05 दिनों तक चलता है जिसमें अलग-अलग दिन अलग-अलग उत्सव मनाये जाते हैं। शक्ति के नौ रूपों में से एक मां दुर्गा, पार्वती का ही एक रूप हैं। माँ दुर्गा का अवतार महिषासुर का वध करने के लिए हुआ था इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। दुर्गा पूजा देवी दुर्गा को समर्पित है और हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। ऐसे में आइए जानते हैं कि 2024 में कब मनाई जाएगी दुर्गा पूजा।
कब से कब तक दुर्गा पूजा?
नवरात्रि का दुर्गा पूजा उत्सव षष्ठी तिथि के छठे दिन शुरू होता है और दशमी तिथि या नवरात्रि के दसवें दिन समाप्त होता है। इस वर्ष दुर्गा पूजा 8 अक्तूबर को शुरू होती है और 13 अक्तूबर 2024 को मूर्ति विसर्जन के साथ समाप्त होती है।
दुर्गा पूजा की प्रमुख तिथियां
दुर्गा पूजा का पहला दिन- 8 अक्तूबर 2024, बिल्व निमंत्रण
दुर्गा पूजा का दूसरा दिन- 09 अक्तूबर 2024, कल्पारंभ, अकाल बोधन
दुर्गा पूजा का तीसरा दिन- 10 अक्तूबर 2024, नवपत्रिका पूजा, कोलाबोऊ पूजा
दुर्गा पूजा का चौथा दिन- 11 अक्तूबर 2024, दुर्गाअष्टमी, कुमारी पूजा, संधि पूजा, महा नवमी
दुर्गा पूजा का पांचवां दिन- 12 अक्तूबर 2024, बंगाल महा नवमी, नवमी हवन, विजयादशमी
दुर्गा पूजा का छठवां दिन- 13 अक्तूबर 2024, बंगाल विजयादशमी, सिंदूर उत्सव
दुर्गा पूजा का महत्व
दुर्गा पूजा पूरे भारत में, विशेषकर पश्चिम बंगाल में धूमधाम से मनाई जाती है। यह राक्षस राजा महिषासुर पर देवी दुर्गा की जीत का प्रतीक है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, अंधकार पर प्रकाश और दुनिया की रक्षा करने की ईश्वर की शक्ति का प्रतीक है।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस महिषासुर को एक वरदान प्राप्त था जिसने उसे लगभग अजेय बना दिया था। उसने स्वर्ग और पृथ्वी को आतंकित कर दिया और कहर और दुख बरपाया। इस खतरे का मुकाबला करने के लिए, देवताओं ने देवी दुर्गा का निर्माण किया, जिन्होंने विभिन्न देवताओं की शक्तियों को संयोजित किया। भीषण युद्ध के बाद उन्होंने महिषासुर को परास्त किया और शांति एवं व्यवस्था बहाल की।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।