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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Dhanteras 2021 Shopping Muhurat Puja Vidhi Shubh Time to Buy Gold Silver on Dhanteras

Dhanteras 2021 Shopping Muhurat Timing: धनतेरस पर आज इस शुभ मुहूर्त में करें सोना चांदी से लेकर बर्तन तक की खरीदारी

Tue, 02 Nov 2021 08:26 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 02 Nov 2021 08:26 AM IST
सार

धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदने के लिए 02 नवंबर को सुबह 06 बजकर 34 मिनट से लेकर 11 बजकर  30 मिनट तक शुभ रहेगा। अगर धनतेरस के शाम के मुहूर्त की बात करें तो 06 बजकर 18 मिनट से रात के 10 बजे तक खरीदारी के लिए अच्छा समय रहेगा।

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Dhanteras 2021 Shopping Muhurat Puja Vidhi Shubh Time to Buy Gold Silver on Dhanteras
Dhanteras 2021 Shopping Muhurat Timing: धनतेरस के शुभ अवसर और मुहूर्त पर नया कार्य करने और खरीदारी से इसमें तेरह गुने की वृद्धि होती है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 Dhanteras 2021 Shopping Muhurat Timing :  आज धनतेरस ( Dhanteras 2021) है और इस दिन खरीदारी करने से उसमें तेरह गुना की बढ़ोतरी साल भर होती रहती है। इसके अलावा आज धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस योग में खरीदारी ,निवेश और शुभ कार्यों की शुरुआत करने पर इसमें तीन गुने का लाभ मिलता है। आज धनतेरस पर यह योग सुबह से लेकर दोपहर करीब 12 बजे तक रहेगा। ऐसे में इस समय धनतेरस ( Dhanteras 2021) की शुभ खरीदारी बहुत ही शुभ और फल देने वाली रहेगी। सुबह से लेकर शाम तक धनतेरस के मौके पर बाजार में खरीदारी की रौनक रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का त्योहार आता है। धनतेरस शुभ दिवाली के दो दिन पहले आता है। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी के साथ धन के देवता कुबेर, भगवान गणेश, यमदेव और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन ही आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान सोने के कलश के साथ प्रगट हुए थे। धनतेरस के दिन सोने-चांदी की चीजें और बर्तन खरीदने की परंपरा होती है। ऐसा कहा जाता है धनतेरस के शुभ अवसर और मुहूर्त पर नया कार्य करने और खरीदारी से इसमें तेरह गुने की वृद्धि होती है।
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धनतेरस का महत्व ( Dhanteras 2021 Importance And Significance)
धनतेरस के ही दिन पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव का त्योहार शुरू हो जाता है। धनतेरस के दिन लोग अपने घर की साफ सफाई के बाद शाम के समय दीपक प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी पूजा करते हैं। धनतेरस के दिन विशेष रूप से भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि के अलावा धन के देवता भगवान कुबेर और समृद्धि प्रदान करने वाले देव गणेश जी की भी वंदना की जाती है। धनतेरस के दिन सोने-चांदी और बर्तन खरीदा जाता है। धनतेरस की शुभ खरीदारी से भविष्य में अच्छे फल की प्राप्ति होती है।   
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धनतेरस पूजा विधि ( Dhanteras 2021 Puja Vidhi)
ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन से ही माता लक्ष्मी सभी पर अपनी शुभ कृपा बरसाने लगती हैं।  धनतेरस के दिन यानी कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे ऐसे में इस दिन सुबह इनकी षोडशोपचार विधि की पूजा करनी चाहिए। शाम के समय घर के हर कोनों में घी और सरसों के तेल का दीपक जलाकर रखें। धनतेरस पर घर के दक्षिण दिशा में भगवान यम के नाम का दीपक जरूर रखें। 
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धनतेरस पर इस शुभ मुहूर्त में करें खरीदारी ( Shopping Muhurat Timing For Dhanteras 2021)
वैसे तो धनतेरस के पूरे दिन खरीदारी की जा सकती हैं, लेकिन शुभ मुहूर्त में धनतेरस की खरीदारी करने पर बहुत ही अच्छे फल की प्राप्ति होती है। धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदने के लिए 02 नवंबर को सुबह 06 बजकर 06 मिनट से लेकर 11 बजकर  31 मिनट तक शुभ रहेगा। अगर धनतेरस के शाम के मुहूर्त की बात करें तो 06 बजकर 18 मिनट से रात के 08 बजकर 11 मिनट तक खरीदारी के लिए अच्छा समय रहेगा।


धन्वंतरि पूजा के ध्यान और मंत्र

ॐ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः.
सूक्ष्मस्वच्छाति हृद्यांशुक परिविलसन्मौलि मंभोजनेत्रम ||
कालाम्भोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारू पीतांबराढ्यम.
वन्दे धन्वंतरिं तं निखिल गदवन प्रौढदावाग्नि लीलम ||
ॐ धन्वंतराय नमः ||

आरोग्य प्राप्ति हेतु धन्वंतरि देव का पौराणिक मंत्र

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः ||

अर्थात्- परम भगवन को, जिन्हें सुदर्शन वासुदेव धन्वंतरि कहते हैं, जो अमृत कलश लिए हैं, सर्व भयनाशक हैं, सर्व रोग नाश करते हैं, तीनों लोकों के स्वामी हैं और उनका निर्वाह करने वाले हैं, उन विष्णु स्वरूप धन्वंतरि को सादर नमन है।
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