{"_id":"5bea6d51bdec2269a369b90d","slug":"chhath-puja-2018-surya-shashti-shubh-muhurat-and-timing","type":"story","status":"publish","title_hn":"छठ पूजा 2018: आज है सूर्य षष्ठी, शुभ मुहूर्त में दिया जाएगा डूबते सूर्य को अर्ध्य","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
छठ पूजा 2018: आज है सूर्य षष्ठी, शुभ मुहूर्त में दिया जाएगा डूबते सूर्य को अर्ध्य
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 13 Nov 2018 01:22 PM IST
विज्ञापन
छठ पूजा 2018
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज सूर्य षष्ठी का पर्व है जिसे डाला छठ और छठ पूजा के नाम भी जाना जाता है। सूर्य षष्ठी की शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। इसके अगले दिन सप्तमी तिथि को उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर इस पर्व का समापन किया जाएगा। छठ पर्व को मनाने के पीछे धार्मिक कारण तो है ही, साथ ही इसके पीछे कई वैज्ञानिक महत्व भी है।
विज्ञापन
छठ पर्व का वैज्ञानिक महत्व
छठ पूजा सूर्य से जुड़े होने के कारण इसे सूर्य षष्ठी कहते हैं। चैत्र मे सूर्य का उत्तरायण में रहते हुए और कार्तिक मे सूर्य दक्षिणायन में रहते हुए सूर्य की महत्ता को दर्शाता है। चैत्र के समय में पढ़ने वाला सूर्य सायन मेष राशि सूर्य अपने उच्चस्थ स्थिति के अंतर्गत पड़ता है और कार्तिक में पढ़ने वाला छठ सूर्य सायन तुला राशि मे सूर्य अपने नीचस्थ के अन्तर्गत पड़ता है। उपरोक्त दोनों सूर्य के स्थिति मे हमारे शरीर में कफ और पित्त का असंतुलन होता है। जिससे हमारे उदर और आंतों में विकार उत्पन्न होता है जिसके कारण हमारा पाचन तंत्र प्रभावित होता है। उपरोक्त दोनों स्थितियों में सूर्य की पराबैंगनी किरणें सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती है। सूर्य का प्रकाश जब पृथ्वी पर पहुंचने से पहले, वायुमंडल में प्रवेश करने पर उसे आयन मंडल मिलता है।
विज्ञापन
पराबैगनी किरणों का वायुमंडल अपने ऑक्सीजन तत्त्व को संश्लेषित कर उसे उसके एलोट्रोप ओजोन में बदल देता है। इस क्रिया द्वारा सूर्य की पराबैगनी किरणों का अधिकांश भाग पृथ्वी के वायुमंडल में ही अवशोषित हो जाता है। पृथ्वी की सतह पर केवल उसका नगण्य भाग ही पहुँच पाता है। जिसकी आवश्यकता पृथ्वी पर मानव जीवन के लिए काफी लाभकारी होती है क्योंकि यह किरणें वातावरण में बहुत सारे हानिकारक कीटाणु एवं विषाणु रक्षा करने में सहायक होती है साथ ही साथ इनकी अल्पता के कारण मानव जीवन में चय- उपचय की क्रिया में असंतुलन भी दिखाई देता है।
विज्ञापन
ऐसी स्थिति में छठ पूजा की परंपरा इन स्थितियों से बचाने में सहायक होती है तथा शरीर को इस वातावरण में ढलने में सहायक होती है। छठ जैसी खगोलीय स्थिति (चंद्रमा और पृथ्वी के भ्रमण तलों की सम रेखा के दोनों छोरों पर) सूर्य की पराबैगनी किरणें कुछ चंद्र सतह से परावर्तित तथा कुछ गोलीय अपवर्तित होती हुई, पृथ्वी पर पुन: सामान्य से अधिक मात्रा में पहुँच जाती हैं। वायुमंडल के स्तरों से आवर्तित होती हुई, सूर्यास्त तथा सूर्योदय को यह और भी सघन हो जाती है।
शुभ मुहूर्त
संध्या अर्घ्य (13-11-2018)
तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ का प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू, बनाते हैं। इसके अलावा चढ़ावा के रूप में लाया गया साँचा और फल भी छठ प्रसाद के रूप में शामिल होता है। शाम को पूरी तैयारी और व्यवस्था कर बाँस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रति के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं। सभी छठव्रति एक नियत तालाब या नदी किनारे इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य दान संपन्न करते हैं। सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मैया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है|
उषा अर्घ्य (14-11-2018)
चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रति वहीं पुनः इकट्ठा होते हैं जहाँ उन्होंने पूर्व संध्या को अर्घ्य दिया था। पुनः पिछले शाम की प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती है। सभी व्रति तथा श्रद्धालु घर वापस आते हैं, व्रति घर वापस आकर गाँव के पीपल के पेड़ जिसको ब्रह्म बाबा कहते हैं वहाँ जाकर पूजा करते हैं। पूजा के पश्चात् व्रति कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं जिसे पारण या परना कहते हैं।
पूजा मुहूर्त
13 नवंबर 2018 (संध्या अर्घ्य)
सूर्यास्त का समय - 17:28:46
14 नवंबर 2018 (उषा अर्घ्य)
सूर्योदय का समय - 06:42:31