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शक्ति साधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि आज से शुरू, जानिए कलश स्थापना समेत अखंड ज्योति के नियम
Thu, 19 Mar 2026 07:04 AM IST
Vinod Shukla
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Thu, 19 Mar 2026 07:04 AM IST
सार
chaitra navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के त्योहार का विशेष महत्व होता है। चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन पृथ्वी पर होता है और इनके 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है।
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Chaitra Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति साधना का सर्वोत्तम काल माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा की उपासना न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि घर-परिवार में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का संचार भी करती है। धार्मिक मान्यताओं के साथ यदि वास्तु शास्त्र के नियमों का भी ध्यान रखा जाए, तो साधना का प्रभाव और अधिक फलदायी हो सकता है।
पूजा स्थान की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की स्थापना के लिए घर का ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। यह दिशा देवताओं का स्थान मानी गई है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है। यदि यह संभव न हो, तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी पूजा स्थल बनाया जा सकता है।यद्धपि देवी माँ का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते वक्त आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे।शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है एवं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को मानसिक शांति अनुभव होती है।
स्वच्छता और पवित्रता का रखें ध्यान
नवरात्रि में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। पूजा स्थान के आसपास किसी प्रकार की गंदगी या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। वास्तु के अनुसार, जहां स्वच्छता होती है, वहीं सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। प्रतिदिन पूजा से पहले स्थान को साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है।
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नवरात्रि की शुरुआत में कलश स्थापना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। वास्तु के अनुसार कलश को हमेशा मिट्टी या तांबे के पात्र में स्थापित करें और उसे पूजा स्थान के केंद्र में रखें। कलश के पास जौ बोना भी शुभ माना जाता है, जो समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है। ध्यान रखें कि कलश के ऊपर रखा नारियल टूटा हुआ या दोषपूर्ण न हो।
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है। दीपक को हमेशा अग्नि कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। यह दिशा अग्नि तत्व से संबंधित होती है और यहां दीपक रखने से ऊर्जा का संतुलन बना रहता है। साथ ही, दीपक को ऐसी जगह रखें जहां हवा का सीधा प्रभाव न हो।
रंगों का चयन और सजावट
वास्तु शास्त्र में रंगों का भी विशेष महत्व होता है। नवरात्रि में लाल, पीला और केसरिया रंग अत्यंत शुभ माने जाते हैं, क्योंकि ये ऊर्जा और उत्साह के प्रतीक हैं। पूजा स्थान पर इन रंगों के वस्त्र, फूल या सजावट का प्रयोग करने से वातावरण अधिक पवित्र और सकारात्मक बनता है।
भोग और प्रसाद रखने की दिशा
मां दुर्गा को अर्पित किया जाने वाला भोग हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। यह दिशा देवताओं के लिए अनुकूल मानी जाती है। प्रसाद को साफ और शुद्ध पात्र में रखें तथा उसे ढककर रखना भी उचित माना जाता है।
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पूजा स्थान की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की स्थापना के लिए घर का ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। यह दिशा देवताओं का स्थान मानी गई है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है। यदि यह संभव न हो, तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी पूजा स्थल बनाया जा सकता है।यद्धपि देवी माँ का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते वक्त आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे।शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है एवं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को मानसिक शांति अनुभव होती है।
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स्वच्छता और पवित्रता का रखें ध्यान
नवरात्रि में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। पूजा स्थान के आसपास किसी प्रकार की गंदगी या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। वास्तु के अनुसार, जहां स्वच्छता होती है, वहीं सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। प्रतिदिन पूजा से पहले स्थान को साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है।
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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में मां की स्थापना करते समय न करें ये गलती, जानें इससे जुड़े नियम
कलश स्थापना के नियमनवरात्रि की शुरुआत में कलश स्थापना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। वास्तु के अनुसार कलश को हमेशा मिट्टी या तांबे के पात्र में स्थापित करें और उसे पूजा स्थान के केंद्र में रखें। कलश के पास जौ बोना भी शुभ माना जाता है, जो समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है। ध्यान रखें कि कलश के ऊपर रखा नारियल टूटा हुआ या दोषपूर्ण न हो।
Chaitra Navratri 2026: माता रानी को खुश करने के लिए करें ये उपाय, प्रसन्न होंगी देवी और बरसेगी कृपा
अखंड ज्योति और दीपक की दिशानवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है। दीपक को हमेशा अग्नि कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। यह दिशा अग्नि तत्व से संबंधित होती है और यहां दीपक रखने से ऊर्जा का संतुलन बना रहता है। साथ ही, दीपक को ऐसी जगह रखें जहां हवा का सीधा प्रभाव न हो।
रंगों का चयन और सजावट
वास्तु शास्त्र में रंगों का भी विशेष महत्व होता है। नवरात्रि में लाल, पीला और केसरिया रंग अत्यंत शुभ माने जाते हैं, क्योंकि ये ऊर्जा और उत्साह के प्रतीक हैं। पूजा स्थान पर इन रंगों के वस्त्र, फूल या सजावट का प्रयोग करने से वातावरण अधिक पवित्र और सकारात्मक बनता है।
भोग और प्रसाद रखने की दिशा
मां दुर्गा को अर्पित किया जाने वाला भोग हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। यह दिशा देवताओं के लिए अनुकूल मानी जाती है। प्रसाद को साफ और शुद्ध पात्र में रखें तथा उसे ढककर रखना भी उचित माना जाता है।
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