Basant Panchami 2024: बंगाल के लोग सरस्वती पूजा से पहले बेर खाने से क्यों करते हैं परहेज?
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में भक्त मां सरस्वती के साथ भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती की भी पूजा करते हैं। वहीं बंगाल में एक ऐसी प्रथा है जो बाकी राज्यों से अलग है। बंगाल के लोग सरस्वती पूजा या वसंत पंचमी से पहले बेर खाने से परहेज करते हैं।
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Sarswati Puja: वसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है। देवी सरस्वती को ज्ञान, कला और संगीत की देवी माना जाता है। इस दिन लोग मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं। पूजा के दौरान पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों में अलग अनुष्ठान होते हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में भक्त मां सरस्वती के साथ भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती की भी पूजा करते हैं। वहीं बंगाल में एक ऐसी प्रथा है जो बाकी राज्यों से अलग है। बंगाल के लोग सरस्वती पूजा या वसंत पंचमी से पहले बेर खाने से परहेज करते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता।
बंगाल में सरस्वती पूजा से पहले क्यों नहीं खाते बेर ?
बंगाल के लोग सरस्वती पूजा या वसंत पंचमी से पहले बेर खाने से परहेज करते हैं। ब्राह्मण संहिता और रामायण जैसे कई पुराने ग्रंथों में बेर का उल्लेख मिलता है। रामायण की कहानी में शबरी ने श्री राम को जंगली बेर का फल दिया था। इसके अलावा, भगवान विष्णु का संबंध भी बेर के पेड़ से जुड़ा माना जाता है। श्री विष्णु को संस्कृत में बद्री कहा जाता है। सांस्कृतिक महत्व होने के बावजूद भी बंगाल में सरस्वती पूजा से पहले बेर खाना सही नहीं माना जाता है। बसंत ऋतु का फल होने के कारण बेर बसंत पंचमी के आसपास ही बाजारों में आते हैं । परंतु इसका भोग सबसे पहले देवी सरस्वती को लगाया जाता है और इसके बाद प्रसाद के रूप में बेर खाए जाते हैं। इस शुभ दिन से पहले बेर खाना का अर्थ है कि देवी सरस्वती का अपमान करना। बंगाल के कुछ घरों में सरस्वती पूजा सम्पन्न होने के बाद शाम को पारंपरिक बेर का अचार तैयार किया जाता है।
बंगाल में सरस्वती पूजा का महत्व
सरस्वती पूजा बंगाल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। इस त्योहार की तैयारी कई दिनों पहले से ही शुरू हो जाती है। इस दिन वीणावादिनी मां सरस्वती की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। दोपहर में देवी की पूजा कर ढेर सारा प्रसाद चढ़ाया जाता है। ताजे पीले और सफेद फूल और बेर आदि प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। सरस्वती पूजा का अवसर बच्चों की पढ़ाई और आध्यात्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है।