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Amavasya Kab Hai: आज या कल कब है अमावस्या ? जानिए पूजा विधि और दान-स्नान का धार्मिक महत्व
Sun, 14 Jun 2026 09:08 AM IST
Vinod Shukla
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Sun, 14 Jun 2026 09:08 AM IST
सार
Amavasya Kab Hai: इस वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि दो दिन है जिससे कारण लोगों के मन में संशय है कब है अमावस्या। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व और पूजा विधि।
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सोमवती अमावस्या 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
विस्तार
Amavasya Kab Hai: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह अमावस्या तिथि आती है जिसमें पितरों की तर्पण, गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। जून माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमाह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर पितरों की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा का विशेष महत्व रहता है। इसके अलावा अमावस्या तिथि पर स्नान,दान, जप, पूजा और व्रत करने से जीवन से कष्ट दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इस बार सोमवती अमावस्या की तिथि को लेकर थोड़ा संशय बना हुआ है,दरअसर अमावस्या तिथि दो दिन पड़ रही है। आइए जानते हैं कब है अमावस्या 14 या 15 जून को और इसका महत्व।
कब है अमावस्या 14 या 15 जून
पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत, 14 जून को यानी आज रविवार को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी, जो अगले दिन यानी 15 जून को सुबह 08 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इस तरह के उदया तिथि के आधार पर 15 जून को अमावस्या मनाई जाएगी। सोमवार के दिन पड़ने के कारण सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून को मनाई जाएगी।
अमावस्या और सोमवार का संयोग
पंचांग के अनुसार, हर माह अमावस्या तिथि है, जिसमें वार के अनुसार हर का अपना विशेष महत्व होता है। जब सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या पड़ती है उसे सोमवाती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दिन बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव की पूजा-आराधना और दर्शन करते हैं। अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसका काफी महत्व बढ़ गया है। सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान करने के लिए गंगा के घाटों और मंदिरों में बड़ी भीड़ एकत्रित होती है।
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इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व काफी बढ़ गया है। सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे में इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें। अगर किसी कारण से गंगा स्नान न कर पाएं तो नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करें। फिर इसके बाद शिवजी की पूजा के लिए मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल और बेलपत्र अर्पित करें। इसके साथ ही पीपले के पेड़ को जल अर्पित करें और पितरों को तर्पण करते हुए उनका आशीर्वाद लें।
अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है और इस दिन पितरों को तर्पण करने से बाद दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को चावल, आटा, दाल, चीनी मिठाई और फल आदि चीजों का दान करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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कब है अमावस्या 14 या 15 जून
पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत, 14 जून को यानी आज रविवार को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी, जो अगले दिन यानी 15 जून को सुबह 08 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इस तरह के उदया तिथि के आधार पर 15 जून को अमावस्या मनाई जाएगी। सोमवार के दिन पड़ने के कारण सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून को मनाई जाएगी।
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अमावस्या और सोमवार का संयोग
पंचांग के अनुसार, हर माह अमावस्या तिथि है, जिसमें वार के अनुसार हर का अपना विशेष महत्व होता है। जब सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या पड़ती है उसे सोमवाती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दिन बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव की पूजा-आराधना और दर्शन करते हैं। अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसका काफी महत्व बढ़ गया है। सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान करने के लिए गंगा के घाटों और मंदिरों में बड़ी भीड़ एकत्रित होती है।
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क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या ? जानिए संयोग, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
सोमवती अमावस्या पूजा महत्वइस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व काफी बढ़ गया है। सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे में इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें। अगर किसी कारण से गंगा स्नान न कर पाएं तो नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करें। फिर इसके बाद शिवजी की पूजा के लिए मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल और बेलपत्र अर्पित करें। इसके साथ ही पीपले के पेड़ को जल अर्पित करें और पितरों को तर्पण करते हुए उनका आशीर्वाद लें।
Somvati Amavasya 2026: 15 जून को बन रहा दुर्लभ शुभ योग, जानें पितृ तर्पण, दान और गौ सेवा का महत्व
सोमवती अमावस्या पर दानअमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है और इस दिन पितरों को तर्पण करने से बाद दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को चावल, आटा, दाल, चीनी मिठाई और फल आदि चीजों का दान करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।