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Akshaya Tritiya 2025: कब है अक्षय तृतीया, जानिए महत्व और क्यों होती है यह तिथि इतनी खास

Tue, 22 Apr 2025 04:47 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 22 Apr 2025 04:47 PM IST
सार

Akshaya Tritiya 2025: अक्षय का मतलब होता है कि कभी न खत्म होने वाला। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। धन-दौलत, सुख-समृद्धि और परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही खास माना जाता है। 

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Akshaya Tritiya 2025 Date Importance Puja Vidhi Akshaya Tritiya Kab Hai
अक्षय तृतीया का महत्व - फोटो : adobe stock

विस्तार

Akshaya Tritiya 2025: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया के त्योहार का विशेष महत्व होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी की खरीदारी, दान और पुण्य काम करने का विशेष महत्व होता है। अक्षय का मतलब होता है कि कभी न खत्म होने वाला। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। धन-दौलत, सुख-समृद्धि और परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही खास माना जाता है। 
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इस तिथि के दिन पूजा-पाठ, दान, स्नान और शुभ कार्य करने से उनका फल अक्षय ही रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही युधिष्ठिर को भगवान श्रीकृष्ण ने अक्षय पात्र दिया था, जिसमें कभी भी भोजन समाप्त नहीं होता था  अक्षय तृतीया का स्वयं सिद्ध मुहूर्त के रूप में भी बड़ा महत्व है। अक्षय तृतीया पर बिना पंचांग देखे भी इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह,गृह प्रवेश,घर,भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं अक्षय तृतीया क्यों इतनी खास है।
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अक्षय तृतीया क्यों है खास
  • भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था। इस दिन को परशुराम जयंती के तौर पर भी मनाया जाता है। भगवान परशुराम को आठ चिरंजीवियों में से एक माना गया है।
  • महाभारत का युद्ध भी इसी दिन समाप्त हुआ था।
  • ग्रंथों के अनुसार त्रेता और सतयुग का आरंभ भी अक्षय तृतीया को हुआ था। इसलिए इस युगादि तिथि के नाम से भी जाना जाता है।
  • स्वर्ग के राजा इंद्र की पत्नी देवी इंद्राणी यही व्रत करके इसके पुण्य प्रताप से जयंत नामक पुत्र प्राप्त किया।
  • देवी अरुंधति भी यही व्रत करके अपने पति महर्षि वशिष्ठ के साथ आकाश में सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त कर सकीं।
  • प्रजापति दक्ष की पुत्री रोहिणी इसी व्रत के कारण अपने पति चंद्र की सबसे प्रिय रानी रहीं।उन्होंने बिना नमक खाए इस व्रत को पूर्ण किया था।
  • भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण, हयग्रीव का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था।  
  • ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अविर्भाव भी इसी दिन हुआ था।
  • बद्रीनाथ धाम के कपाट भी अक्षय तृतीया के ही के दिन पुनः खुलते हैं और इसी दिन से चारों धामों की पावन यात्रा प्रारम्भ हो जाती है।
  •  वृन्दावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मंदिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।बाकी पूरे वर्ष चरण वस्त्रों से ही ढके रहते हैं।
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