Akshaya Tritiya: शुभ संयोग में अक्षय तृतीया, दान और पूजा से मिलेगा अक्षय फल
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अक्षय तृतीया का पर्व महामुहूर्त का पर्व है। अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त में से एक है। इसमें बिना मुहूर्त देखे सभी तरह के शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, धार्मिक अनुष्ठान सपंन्न किया जा सकते है। इस बार ज्योतिष के नजरिए से कई तरह के शुभ संयोग का निर्माण भी हो रहा है। अक्षय तृतीया पर सूर्य, चंद्रमा और मंगल अपनी उच्च राशि में रहेगा। इसके अलावा शुक्र और शनि अपनी राशि में रहकर शुभ फल देने वाला होगा। अक्षय तृतीया पर कई तरह के राजयोग भी बन रहे हैं, जिस कारण से इस पर्व का खास महत्व हो जाता है।
शुभ योग में अक्षय तृतीया
- अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धियोग का निर्माण भी हो रहा है। किसी भी शुभ कार्य का आरंभ अगर सर्वार्थ सिद्धि में होता है यह बेहद शुभ माना जाता है।
- इसके अलावा रविवार को अक्षय तृतीया पर रवियोग भी है। इस योग आरंभ शनिवार की शाम से शुरू हो जाएगा जो रविवार रात लगभग 11 बजे तरह रहेगा। ज्योतिष में रवियोग को काफी शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस योग में चीजों का दान करना शुभ फलदायी होता है।
- अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धियोग के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। यह योग दान,स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन के लिए श्रेष्ठ होता है।
दान का महत्व
अक्षय तृतीया की तिथि काफी शुभ मानी गई है। इस दिन 14 तरह के दान का महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
पूजा-विधि
अक्षय तृतीया पर स्नान ध्यान करके पूजा योग्य होकर अपने पूजा स्थान अथवा मंदिर में बैठें, उसके पश्चात गणेश जी को प्रणाम करते हुए भगवान विष्णु को ॐ विष्णवे नमः कहते हुए अपने ऊपर जल छिड़कें और 'दीपस्थ देवतायै नमः' मंत्र बोलते हुए दीप जलाएं और दीप देवता को प्रणाम करें। इसके बाद भगवान गणेश के इस मंत्र‘ॐ गं गणपतये नमः का एक माला जप करें। अपनी श्रद्धा शक्ति के अनुसार माँ की पूजा-आराधना करें तथा अपनी राशि के अनुसार दिए गए मंत्र का 121 बार जप करें।
अक्षय तृतीया से जुड़ी बातें
- सभी शुभ तिथियों में अक्षय तृतीया का महत्व बहुत है। इस तिथि पर हर तरह के शुभ कार्य किया जा सकता है।
- अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदना और जमीन-जायदाद के सौदे करना शुभ माना जाता है।
- इस अबूझ तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष आराधना होती है।
- पितरों का तर्पण और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है।
- अक्षय तृतीया के दिन सतयुग और त्रेता युग का आरंभ हुआ था।
- मुहूर्त शास्त्र के अनुसार साल में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त होते हैं, जिसमें अक्षय तृतीया का विशेष स्थान होता है।
- अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी और हयग्रीव का जन्म हुआ था।
- बद्रीनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया के ही दिन खुलते हैं।