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Ahoi Ashtami Vrat 2024: पहली बार रख रही हैं अहोई अष्टमी का व्रत, तो इन पांच बातों का जरूर रखें ध्यान

Fri, 18 Oct 2024 07:19 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 18 Oct 2024 07:19 AM IST
सार

Ahoi Ashtami Vrat 2024: अहोई अष्टमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है।

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Ahoi Ashtami Vrat 2024 date puja vidhi and vrat niyam in hindi
Ahoi Ashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ahoi Ashtami Vrat 2024: अहोई अष्टमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जिसका पारण तारों को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की पूजा की जाती है। इससे भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

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पंचांग के अनुसार इस साल 24 अक्तूबर 2024 को अहोई अष्टमी का उपवास रखा जाएगा। इस दिन साध्य योग और पुष्य नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। इस योग में अहोई माता की पूजा अर्चना करने से संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं पहली बार अहोई अष्टमी का व्रत हर महिला के लिए बेहद खास होता है। परंतु व्रत में कई नियमों का पालन भी किया जाता है, जिससे व्रत का संपूर्ण फल मिलता है। ऐसे आइए अहोई अष्टमी व्रत के नियमों के बारे में जानते हैं।

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अहोई अष्टमी के व्रत में इन पांच बातों का जरूर रखें ध्यान

  • यदि आप पहली बार अहोई अष्टमी का व्रत रख रही हैं, तो याद रखें व्रत के दिन दोपहर में सोने से बचें। आप दिन में अहोई माता के भजन-कीर्तन करें। ऐसा करना बहुत ही फलदायी होता है।
  • पहली बार इस उपवास को रखने वाली महिलाएं ध्यान रखें कि, व्रत में सुई, कील जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है।
  • अहोई अष्टमी व्रत में अहोई माता की कथा जरूर सुनें। साथ ही विधिनुसार उनकी पूजा अर्चना करें। इस दौरान संतान को अपने साथ रखें। इससे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं।
  • व्रत का पारण रात में तारों को अर्घ्य देकर करना चाहिए। इस दौरान अर्घ्य देने के लिए चांदी से बने लोटे का इस्तेमाल करें। 
  • अहोई माता की पूजा के लिए बनाए गए प्रसाद को संतान को जरूर देना चाहिए। इससे देवी की कृपा जीवन पर बनी रहती हैं।


अहोई अष्टमी की आरती 

जय अहोई माता जय अहोई माता । तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता ।।
ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता । जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता ।।
तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता । कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता ।।
जिस घर थारो वास वही में गुण आता । कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता ।।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता । खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता ।।
शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता । रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता ।।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता । उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता ।।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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