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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Ahoi Ashtami 2024 date and puja vidhi know Ahoi mata aarti

Ahoi Ashtami 2024: 23 या 24 अक्तूबर कब रखा जाएगा अहोई अष्टमी का व्रत ? जानें तिथि और पूजा विधि

Mon, 21 Oct 2024 06:58 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Mon, 21 Oct 2024 06:58 AM IST
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Ahoi Ashtami 2024 date and puja vidhi know Ahoi mata aarti
Ahoi Ashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

Ahoi Ashtami 2024: हिंदू धर्म में संतान से जुड़े कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें अहोई अष्टमी विशेष है। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी उम्र, तरक्की और खुशहाल जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जिसका पारण तारों को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। इस दिन अहोई माता की पूजा का विधान है। मान्यता है कि अहोई माता मां पार्वती का ही स्वरूप हैं। ऐसे में उनकी आराधना से महादेव का आशीर्वाद भी मिलता है।

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पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस साल 24 अक्तूबर 2024 को अहोई अष्टमी है। इस दिन साध्य योग और पुष्य नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। इस संयोग में अहोई माता की पूजा अर्चना करने से संतान के जीवन में चल रही समस्याएं समाप्त होती हैं। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि के बारे में जानते हैं।

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अहोई अष्टमी पूजा विधि

  • अहोई अष्टमी के दिन सुबह ही स्नान कर लेना चाहिए। फिर साफ वस्त्रों को धारण करें।
  • अब साफ हाथों से घर की एक दीवार को अच्छे से साफ कर लें।
  • इस दीवार पर गेरू या कुमकुम से अहोई माता की तस्वीर बनाएं। फिर उनके समक्ष दीपक जलाएं और अहोई माता की कथा पढ़ें।
  • कथा सुनने के बाद देवी से बच्चों की रक्षा की प्रार्थना करें।
  • फिर शाम को तब पूजा करें, जब आसमान में तारों का उदय हो जाए।
  • आसमान में तारों का उदय हो जाने के बाद आप उन्हें जल दें, और मंत्रों का जाप करें।
  • फिर पूजा के लिए बने पकवान जैसे हलवा, पूरी, मिठाई, आदि को भोग अहोई माता को लगाएं।
  • इसके बाद पूरे परिवार के साथ माता की पूजा करें।


अहोई अष्टमी की आरती 

जय अहोई माता जय अहोई माता । तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता ।।
ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता । जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता ।।
तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता । कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता ।।
जिस घर थारो वास वही में गुण आता । कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता ।।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता । खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता ।।
शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता । रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता ।।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता । उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता ।।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
 

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