रिटायरमेंट के बाद संगीत का चढ़ा जुनून, अब बना लिया ओल्ड ब्वॉय बैंड
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सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद अधिकांश सरकारी कर्मचारी अपने परिवार तक ही सीमित होकर रह जाते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समय का उपयोग अपने सपनों को पूरा करने में लगाते हैं। ओल्ड ब्वाय बैंड मंडयाली ग्रुप के सदस्य प्रोफेशनल गायक नहीं हैं। इनकी आयु सीमा 62 से 76 वर्ष के बीच में हैं। इन्होंने रिटायर होने के बाद संगीत सीखने का प्रयास किया।
ओल्ड ब्वाय बैंड सेवानिवृत्त अधिकारियों का उद्देश्य मंडयाली बोली का संरक्षण करके सांस्कृतिक विरासत को बचाना है। ये स्वयं ही गाना लिखते और कंपोज करते हैं। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में भी ये कार्यक्रम पेश करेंगे।
यह बैंड जुलाई 2016 से अब तक 15 प्रस्तुतियां दे चुका है और बैंड के सभी सदस्यों ने अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने गुरु एवं संगीतकार उमेश भारद्वाज को दिया है। हाल ही में एक माह पहले पांच गानों की ऑडियो एलबम मंडयाली बीट्स रिलीज की है। बैंड एक वर्ष में दो वीडियो एलबम मंडयाली गानों की लांच करेगा। इस पर अभी काम चल रहा है।
ओल्ड ब्वाय बैंड मंडी के छह सदस्यों का परिचय
बैंड के सदस्यों में नित्यदर्शी वैद्य सिंचाई एवं पब्लिक हेल्थ विभाग चंबा से बतौर एसई रिटायर हुए हैं। विनोद चौधरी सहनिदेशक अभियोजन के पद पर से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, तीसरे सदस्य विनोद बहल बतौर जिला न्यायवादी आबकारी एवं कराधान शिमला से रिटायर हुए हैं। अन्य तीन सदस्य रविकांत कपूर एमब्रिओलोजिस्ट, रामपाल शर्मा एसडीओ, मोहिंद्र पाल वैद्य डीएसओ रहे हैं।
ओल्ड ब्वाय बैंड नाम कैसे पड़ा
इनको संगीत सदन में जाते देख इनके परिवार के सदस्य, मित्र और रिश्तेदार व्यंग्यात्मक ढंग से कटाक्ष कर चिढ़ाते थे। इस पर विनोद बहल ने मंडयाली कविता सुरताल लिख कर इसका उल्लेख किया और मजाक में यह कामना की कि वर्ष 2017 को ओल्ड ब्वाय बैंड के नाम से महाशिवरात्रि के मेले पर पड्डल में प्रस्तुति देंगे।