14 लाख का सालाना पैकेज छोड़ा, अब बने तहसीलदार, जानिए कैसे पाई सफलता
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हर इंसान की जिंदगी में एक समय आता है जो जिंदगी ही बदल देता है। पैसा ही सब कुछ नहीं समाज सेवा भी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद के इन शब्दों ने निशांत का जीवन भी बदल दिया। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के उपमंडल शिलाई के कमरऊ गांव के निशांत तोमर सतौन में ही पले बढ़े हैं।
चेन्नई में निशांत साढ़े 14 लाख के सालाना पैकेज में सिफी नामक कंपनी में बतौर प्रोडक्ट मैनेजर कार्य कर रहे हैं। समाजसेवा का जज्बा उन्हें हिमाचल प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में लेकर लाया है। उन्होंने पहले ही प्रयास में एचएएस परीक्षा पास की है। निशांत तोमर की नियुक्ति तहसीलदार के पद पर हुई है।
अब वह लाखों की नौकरी को छोड़कर समाज सेवा करेंगे। निशांत ने अमर उजाला को बताया कि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने सितंबर 2015 में आईआईएम शिलांग में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि जिंदगी में पैसा ही सब कुछ नहीं होता। आज के युवाओं को सिविल सर्विस में जाकर समाज सेवा करनी चाहिए। उनका यह आखिरी भाषण था।
निशांत उस समय पहली लाइन में बैठे थे। उन्हीं के सामने अब्दुल कलाम की तबीयत भी खराब हुई थी। पूर्व राष्ट्रपति की बातों से प्रेरित होकर निशांत ने जून 2016 से परीक्षा की तैयारी शुरू की। निशांत ने कोई कोचिंग नहीं ली। फिर भी समाजसेवा का जज्बा उन्हें प्रशासनिक सेवा तक लेकर आया।
इससे पहले निशांत ने साल 2009 से 2013 तक पंजाब विश्वविद्यालय से बीटेक की। 2014 से 2016 तक एमबीए आईआईएम शिलांग से की। अप्रैल 2018 में सिफी टेक्नोलॉजी में सालाना साढ़े 14 लाख के पैकेज पर बतौर प्रोडक्ट मैनेजर नियुक्त हुए। अब निशांत लाखों रुपये का पैकेज छोड़ समाज सेवा करेंगे।