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आईपीएस अधिकारी रामेश्वर को क्लार्क आर बारविन पुरस्कार, जेनेवा में किया गया सम्मानित

Thu, 22 Aug 2019 01:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश तोमर, अमर उजाला, पांवटा साहिब (सिरमौर)
सुरेश तोमर, अमर उजाला, पांवटा साहिब (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 22 Aug 2019 01:15 PM IST
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IPS Officer Rameshwar gets award in geneva switzerland
- फोटो : अमर उजाला

आईपीएस (हिमाचल प्रदेश-2003) डिप्टी डायरेक्टर, डब्ल्यूसीसीबी, भारत सरकार रामेश्वर ठाकुर को वन्य जीव कानून प्रवर्तन की दिशा में उनके योगदान के लिए 2019 क्लार्क आर बारविन पुरस्कार से नवाजा गया है। यह पुरस्कार सीआईटीईएस (वन्यजीवों के लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन) की महासचिव इवोन हिगुएरो द्वारा जेनेवा-स्विटजरलैंड में चल रहे सीआईटीईएस की पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी-18) के दौरान एक समारोह में दिया गया।

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वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी रामेश्वर सिंह ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश व हिमाचल का गौरव बढ़ाया है। यूएसए के वाशिंगटन स्थित एनीमल वेलफेयर इंस्टीट्यूट ने आईपीएस रामेश्वर ठाकुर को क्लार्क आर बेविन लॉ एनफोर्समेंट अवार्ड के लिए चयनित किया था। यह पुरस्कार जेनेवा में करीब 187 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कांफ्रेंस ऑफ द पार्टिज सम्मेलन में दिया गया।
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सम्मेलन 2 सालों में विलुप्त हो रही वन्य प्रजातियों की तस्करी को लेकर करवाया जाता रहा है। यह विश्व स्तरीय अवार्ड 3 वर्षों में एक बार दिया जाता है। आईपीएस अधिकारी के नाम का अनुमोदन वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की अतिरिक्त निदेशक तिलोतमा वर्मा ने किया था। आईपीएस अधिकारी ने देश में वन्यप्राणियों व अंगों से जुड़ी तस्करी के लिए खुफिया नेटवर्क जुटाने के बाद ऑपरेशन लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई। 
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आईपीएस आधिकारी का कैरियर उपब्धियों से भरा रहा  
आईपीएस अधिकारी रामेश्वर ठाकुर शिमला के जुब्बलहट्टी निवासी हैं। उन्होंने भारतीय सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के तहत सेवाएं दी हैं। 1994 में हिप्र में बतौर एचपीएस अधिकारी पारी शुरू की थी। हिमाचल कैडर के आईपीएस अधिकारी रामेश्वर ठाकुर को बेहतरीन सेवाओं के लिए 2016 में केंद्रीय कोटे से राष्ट्रपति पुलिस मेडल मिल चुका है। पुलिस विभाग में 9 वर्ष तक एसपीजी में सेवाएं दे चुके हैं।

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