निवेशक मिले तो दिव्यांगों के लिए इलेक्ट्रिक चेयर बनाएंगे युवा अंकुर
चलने-फिरने में असमर्थ देश के करीब पौने दो करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अंकुर शील को ग्लोबल इन्वेस्टर मीट में निवेशकों की तलाश रहेगी। अंकुर शील विदेशों से भारत में बिकने वाली इलेक्ट्रिक व्हील चेयर का प्लांट लगाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर मीट में अपना प्लान भेजा था। इस प्लान को निवेशकों के समक्ष साझा करने के लिए अंकुर शील को निवेशक सम्मेलन के लिए सरकार से निमंत्रण मिल गया है। अंकुर शील ने बताया कि देश की करीब 2.68 करोड़ दिव्यांग जनसंख्या चलने-फिरने में असमर्थ है।
इसमें 1.5 करोड़ के करीब पुरुष और 1.18 करोड़ महिलाएं हैं, जो करीब पौने दो करोड़ गांवों और एक करोड़ शहरों में रहते हैं। यह दिव्यांग वर्तमान में जो व्हील चेयर प्रयोग करते हैं, उसे वह स्वयं नहीं चला सकते। ऐसे में जीवन यापन के लिए उन्हें एक सहायक की आवश्यकता रहती है। इन्हें सहायक की आवश्यकता न रहे, इसके लिए वह इलेक्ट्रिक व्हील चेयर बनाना चाहते हैं। यह व्हील चेयर विदेशों से ही आयात की जाती हैं। भारत में इसे बनाने की अनुमति नहीं है। विदेशों से आने वाली यह व्हील चेयर दो से ढाई लाख रुपये में पड़ती है। इससे गरीब लोगों तक यह नहीं पहुंच पा रही है।
70 से 80 हजार में बनेगी ढाई लाख की चेयर
अंकुर शील ने बताया कि विदेशों से आयात होने वाली इलेक्ट्रिक व्हील चेयर सभी टैक्स को मिलाकर दो से ढाई लाख रुपये में मिलती है। इस व्हील चेयर को मेक इन इंडिया के तहत बनाकर 70 से 80 हजार रुपये में दिव्यांगों तक पहुंचाया जाएगा।
इलेक्ट्रिक व्हील चेयर में 12 वोल्ट की बैटरी होगी। एक बैटरी को चार्ज होने में चार घंटे लगेंगे, जबकि आठ से दस किलो मीटर उससे व्हील चेयर चल सकती है।
अंकुर शील के अनुसार इलेक्ट्रिक व्हील चेयर की बैटरी को चार्ज करने के लिए मोबाइल फोन की बैटरी चार्ज करने से थोड़ी की ज्यादा बिजली की खपत होगी। इतना ही नहीं बाद में इसे सोलर सिस्टम में भी बदला जा सकता है। इलेक्ट्रिक चेयर आठ डिग्री तक की चढ़ाई चढ़ सकती है।