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मोहन चौहान की ‘छोटिए’ नाटी ने धड़ाधड़ बिकवा दिए थे टेपरिकॉर्डर
Mon, 01 Jul 2019 02:05 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 01 Jul 2019 02:05 PM IST
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mohan chauhan
- फोटो : अमर उजाला
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अस्सी के दशक के मशहूर पहाड़ी लोकगायक मोहन सिंह चौहान की ‘छोटिए’ नाटी ने धड़ाधड़ टेपरिकॉर्डर बिकवा दिए थे। उनकी कैसेटों को खरीदने के लिए लोग कतारों में लग जाते थे। अस्सी और नब्बे के दशक में मोहन सिंह की गायकी के खूब जलवे थे। अस्सी के दशक में जब गिने-चुने लोकगायक होते थे तो मोहन सिंह चौहान ऊपरी शिमला के अकेले नाटी किंग थे।
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उनकी ‘तुम्हारी याद में आती है’ कैसेट में ‘तू चेंई गहरअ धार री छोटिए’ गीत ने ऐसा धमाल मचा दिया कि लोग जोर-जोर से टेपरिकॉर्डर बजाकर इसे सुनते। चौहान का कहना है कि इस कैसेट को खरीदने के लिए दुकानों पर लाइनें लग जातीं। हजारों कैसेटें उस दौर में बिकीं। इसे मुंबई से आए मंडी के संगीत निर्देशक एसडी कश्यप के संगीत निर्देशन में निकाला। सबसे पहली कैसेट भी एसडी कश्यप के संगीत निर्देशन में 1983 में ‘दिशाएं गूंजती है’ नाम से निकाली गई।
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तब पहली बार कुल 35 कैसेट निकाले गए। तबसे लेकर अब तक चौहान सैकड़ों गीत गा चुके हैं। चौहान को हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर हिमाचल सुर सम्राट सम्मान से नवाज चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल उन्हें मोहम्मद रफी अवार्ड दे चुके हैं। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह हिमाचल गौरव अवार्ड दे चुके हैं। मोहन सिंह चौहान के बेटे लोकिंद्र चौहान भी लोकगायक हैं। लोकगायक विक्की चौहान मोहन सिंह चौहान के चचेरे भाई हैं। मोहन सिंह जुब्बल के छाजपुर गांव के निवासी हैं।
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यूट्यूब पर ऑडियो गीत है, पर यूट्यूब वीडियो नहीं
मोहन सिंह चौहान 65 साल के हो गए हैं। वह आने वाले महीनों में संगीत निर्देशक सुरेंद्र नेगी के निर्देशन में संस्कृति नाम से नई एलबम निकालने जा रहे हैं। उनका यूट्यूब पर सूरमा, बिरसू गीतों के साथ ऑडियो है, मगर उन्होंने कोई यूट्यूब वीडियो अभी तक नहीं बनाया।
चौहान लोकगीतों से छेड़छाड़ के खिलाफ हैं। वह युवा लोकगायकों को कहते हैं कि वे तकनीक का इस्तेमाल करें, मगर इसमें फूहड़ता न लाएं। चौहान कहते हैं कि उनके समय में दुर्घटना में मरने वालों, मशहूर लोगों आदि पर गायन का चलन था। अब यह खत्म हो गया है।