पहाड़ के इस बेटे ने मनवाया लोहा, जीती देश की पहली मल्टी सिटी मैराथन
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बुलंद हौसले के साथ दौड़े हिमाचल के सिरमौर निवासी सुनील ने स्वास्थ्य तक की परवाह नहीं की। हड्डी के दर्द को भुलाकर सुनील दौड़ा तो सिर्फ अपनी जीत और रियो ओलंपिक में भाग लेने जा रहे देश के धावकों की हौसलाअफजाई के लिए।
द ग्रेट इंडिया रन दिल्ली के इंडिया गेट से यह दौड़ 19 जुलाई को शुरू हुई थी। 6 अगस्त को मुंबई के द गेट-वे आफ इंडिया में समापन होना था। लेकिन, बुलंद हौसले के बूते सुनील ने 1480 किलोमीटर की दौड़ 4 अगस्त को ही पूरी की।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने सुनील शर्मा को द ग्रेट इंडिया रन के सर्टिफिकेट व ट्राफी देकर सम्मानित किया। सुनील के साथ साथ चार अन्य धावकों ने भी दौड़ को पूरा किया। इसमें अरुण भारद्वाज, सिद्घार्थ चौधरी, कौशल व धानी शामिल हैं।
इससे पहले द ग्रेड इंडिया रन के हीरो बने धावक सुनील की पांव की हड्डियों ने सातवें दिन ही जवाब दे दिया था। हड्डियों की दर्द की वजह से सुनील को चिकित्सकों ने दौड़ने से मना कर दिया। लेकिन, वह नहीं माने।
आयोजकों ने उनसे अपनी रिस्क पर दौड़ने के बारे में लिखकर ले लिया था। तब कहीं जाकर उन्हें दौड़ने की अनुमति प्रदान की गई। तब तक उसे साथ दौड़ रहे अन्य धावक करीब 30 किलोमीटर आगे निकल चुके थे।
सोशल मीडिया पर भी छाए सुनील
देश की पहली मल्टी सिटी मैराथन को सुनील ने मात्र 17 दिन में ही पूरा कर अपना दम दिखाया। सुनील ने इसे दो दिन पहले ही पूरा कर सिरमौर को वाकई में पूरे देश में सिरमौर बना दिया। सुनील की इस उपलब्धि से जिला सिरमौर का नाम भी देश के मानचित्र पर रोशन हुआ है।
सात दिन लगातार रहे सबसे आगे
सुनील पहले सात दिन अन्य धावकों से लीड बनाए हुए थे। मगर द ग्रेट इंडिया रन के आयोजकों ने सुनील को निश्चित समयावधि के भीतर दौड़ को पूरा करने का लक्ष्य दिया। इसके बाद सुनील के साथ सिर्फ चार धावक ही बराबरी बनाए हुए थे। सुनील के विजेता बनने की सूचना मिलने के बाद चंडीगढ़ व सिरमौर से उनके प्रशंसक उनसे मिलने पहुंचे। वहीं सोशल मीडिया पर भी उन्हें बधाई देने का तांता लगा हुआ है।
इससे पहले भी दौड़ चुके हैं सुनील
अल्ट्रा मैराथन से पहले जिला सिरमौर की रेणुका विधानसभा के माइना गांव के रहने वाले सुनील शर्मा 22 मार्च 2015 को चंडीगढ़ 127 किलोमीटर लंबी दौड़ लगाकर 13 घंटे 55 मिनट में रेणुका पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए दौड़ लगाई। सुनील ने इस दौड़ में 250 किलोमीटर का सफर 38 घंटे 25 मिनट में तय किया।
मैं अपनी रिस्क पर दौड़ा और जीत गया
दौड़ के पहले सात दिन तक मैं सभी प्रतिभागियों से 25 से 30 किलोमीटर आगे चल रहा था। लेकिन, सातवें दिन के बाद अचानक पांव में दर्द उठा। चिकित्सक डा. कैबिन, डा. दिपाली व डा. अमित की टीम ने उनका चेकअप किया और अनफिट करार दे दिया। लेकिन मैं दौड़ना चाहता था। आयोजकों ने अपनी रिस्क पर दौड़ने की अनुमति दे दी और मैं जीत गया। मुझे गर्व है कि मैं इस दौड़ को पूरा कर पाया हूं। इसके लिए मैं उन प्रशंसकों का भी आभार प्रकट करता हूं, जो मेेरे लिए दुआएं मांग रहे थे। --सुनील शर्मा धावक
अब सुनील का सपना, एशियन गेम्स में गोल्ड
द ग्रेट इंडिया रन के विजेता सुनील शर्मा का कहना है कि देश के लिए एशियन गेम्स मैराथन में पदक जीतना उनका सपना है। प्रदेश सरकार से सहयोग मिला तो, इसके लिए शीघ्र अभ्यास शुरू करेंगे। ‘सेव वाटर-सेव फारेस्ट’ तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के बाद मुश्किल हालात में द ग्रेट इंडिया दौड़ में सफलता हासिल की है।
इसके लिए मेहनत के साथ प्रदेश व जिलावासियों की दुआएं भी काम आई हैं। सिरमौर के रेणुकाजी विस क्षेत्र के माईना निवासी सुनील शर्मा शनिवार को पांवटा कॉलेज पहुंचे, जहां उनका छात्रों ने जोरदार स्वागत किया।
शनिवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि देश के वीर जवानों के लिए दिल्ली से लाहौर तक अमन शांति की दौड़ की तमन्ना रही है। भारत सरकार से मंजूरी मिलती है, तो देश की शान हमारी आर्मी को सलाम व अमन शांति का पैगाम पहुंचाएंगे।
इसके लिए वह दिल्ली से लाहौर तक दौड़ लगाएंगे। शनिवार को वह एसपी सिरमौर सौम्या साम्बशिवन से मिले। जिला पुलिस के माध्यम से पांवटा, नाहन, रेणुकाजी से पांवटा तक नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए दौड़ लगाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा नशे से दूर रहे और खेलों व शिक्षा की तरफ ध्यान दे।