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संगीत को लोगों तक पहुंचाने के लिए सुनील ने शुरू किया ये सफर

Thu, 25 Aug 2016 12:39 PM IST
पंकज तन्हा/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
पंकज तन्हा/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Updated Thu, 25 Aug 2016 12:39 PM IST
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sunil giving music training to children

संगीत में माहिर सुनील मोहिल इन दिनों बच्चों को भी शिक्षा की तालीम दे रहे हैं। सुनील संगीत की शिक्षा ग्रहण कर रहे युवाओं को न केवल गायकी के गुर सिखा रहे हैं, बल्कि उनकी वीडियो एलबम भी तैयार करवा चुके हैं। इनके दो शिष्य प्रदेश स्तर पर आयोजित संगीत प्रतियोगिता में सिरमौर की आवाज भी बन चुके हैं।

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सुनील ने खुद का पहला वीडियो एलबम ‘कौथे गोरी गांव तेरा..,’ 2007 में निकाला था। इसमें 8 पहाड़ी गीत हैं, जिन्हें संगीतबद्ध भी सुनील ने स्वयं किया है। वर्ष 2012 में इन्होंने खुद के पैसों से ‘आर्य गीत’, नाम से एलबम निकाली। इसमें स्वामी दयानंद सरस्वती पर लिखे गए आठ गीत हैं जिसे स्कूली बच्चों ने गाया है। गीतों को सुनील ने स्वयं लिखा और संगीतबद्ध किया था।
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2013 में निकाली एलबम ‘हम भारत के वीर हैं’ में 6 देशभक्ति और आर्य गीत हैं जिन्हें स्कूली बच्चों ने ही गाया है, जबकि गीतों को लिखने के साथ संगीतबद्ध करने का कार्य स्वयं सुनील ने किया है। 2014 में स्वामी दयानंद सरस्वती को समर्पित ऑडियो सीडी में 6 गीत हैं, जिन्हें स्कूली बच्चों ने ही गाया है।
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चंडीगढ़ के प्राचीन कला केंद्र से संगीत विशारद कर चुके आमटा निवासी सुनील मोहिल स्वामी दयानंद सरस्वती से बेहद प्रभावित हैं। सुनील स्वयं अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेला, पांवटा के यमुना उत्सव, सोलन के हिमाचल उत्सव, राजगढ़, नाहन आदि में होने वाले स्टेज शो में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय स्तर की भारतीय वैदिक संगीत संगोष्ठी में भी लगातार अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं।


प्रदेश स्तर पर आयोजित एक संगीत प्रतियोगिता में सुनील से संगीत की शिक्षा ग्रहण कर रहे शिवांश अग्रवाल वर्ष 2014 और आरुषि सैनी वर्ष 2015 में सिरमौर की आवाज, नामक खिताब हासिल कर चुके हैं। इसके अलावा वायस ऑफ हिमाचल में निखिल ठाकुर तीसरे नंबर पर रहे। सुनील अब लोकगीतों पर आधारित एक एलबम निकालने की तैयारियों में जुटे हैं। अमर उजाला से बातचीत में सुनील ने बताया कि उन्हें संगीत से प्यार है। उनका मकसद है कि संगीत को लोगों तक पहुंचाया जाए।

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