फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Simranjeet singh won gold medal in national kickboxing championship

न तो कोचिंग और न ही कोई ट्रेनिंग, बस यहां से सीखा और जीत लिया गोल्ड

Sun, 17 Sep 2017 11:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंबा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंबा Updated Sun, 17 Sep 2017 11:40 AM IST
विज्ञापन
Simranjeet singh won gold medal in national kickboxing championship

न कोई कोच और न ही किसी तरह की खास ट्रेनिंग। फिर भी राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता में हिमाचल की झोली में गोल्ड मेडल डालने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिभा दिखाने का मौका बना लिया। जी हां, ऐसा ही कुछ कारनामा कर दिखाया है चंबा जिले के सिमरन जीत सिंह ने।

विज्ञापन


उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में उनका कोच बना तो इंटरनेट पर यू-ट्यूब के वीडियो। सिमरन जीत सिंह कहते हैं कि वे घर के पास मंजरी गार्डन में रोजाना छह घंटे तक अभ्यास करते थे। उन्होंने बताया कि चार साल पहले यूएफसी शो देखने के बाद किस बॉक्सिंग की ओर उनका रुझान बढ़ा।
विज्ञापन


वे माइक टायसन और जॉन जोंस को देख-देखकर प्रैक्टिस करते रहे। सिमरन जीत सिंह इन्हीं को अपना आदर्श भी मानते हैं। उनका लक्ष्य साल 2020 में होने वाले ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है। उन्होंने हाल ही में छह से 10 सितंबर तक छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुई राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनको चयन अंतराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है। यह प्रतियोगिता अक्तूबर माह में हंगरी में होगी। इसमें पूरे विश्व भर के खिलाड़ी भाग लेंगे। चंबा जिला के सिमरन जीत सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। 

ताईक्वांडो का लिया था प्रशिक्षण
सिमरन जीत सिंह ने कहा कि मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें माता-पिता का भरपूर सहयोग मिला। सिमरन जीत सिंह ने बताया कि किक बॉक्सिंग की तकनीक सीखने के लिए वे यू-टयूब और यूएफसी के शो देखते थे। 

वहां से सीखने के बाद घंटों तक उसकी प्रैक्टिस करते थे। कोचिंग के नाम उन्होंने रवि कुमार से ताईक्वांडो का प्रशिक्षण लिया। इससे भी उन्हें प्रतियोगिता जीतने के लिए काफी लाभ मिला। 


बेहतर कोच मिलें तो निखरेंगे खिलाड़ी
सिमरन जीत सिंह ने कहा कि चंबा में अगर बेहतर कोच उपलब्ध हों तो कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर सकते हैं। इसमें सरकार और प्रशासन को पहल करने की जरूरत है। 

कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी मेहनत के साथ मुकाबला करेंगे। कोशिश रहेगी कि यहां भी देश का नाम रोशन करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed