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कुश्ती, जूडो और बाक्सिंग का चैंपियन है ये खिलाड़ी, अब टीम इंडिया का कोच

Fri, 19 Aug 2016 04:31 PM IST
सरोज पाठक/अमर उजाला, बरमाणा (बिलासपुर)
सरोज पाठक/अमर उजाला, बरमाणा (बिलासपुर) Updated Fri, 19 Aug 2016 04:31 PM IST
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Sanjay Yadav Become Coach of Kick boxing Organization India senior team.
डॉ. संजय यादव - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके डॉ. संजय यादव को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ किक बॉक्सिंग ऑर्गेनाइजेशन (वाको) इंडिया सीनियर टीम का कोच नियुक्त किया गया है।

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इंडिया सीनियर टीम कोरिया में दो से नौ सितंबर तक होने वाली वाको एशियन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लेगी। साथ ही 21 से 28 सितंबर तक रशिया में होने वाली वाको किक बॉक्सिंग वर्ल्ड कप डायमंड-2016 में देश का प्रतिनिधित्व करेगी।
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इसमें डॉ. यादव टीम के कोच होंगे। डॉ. संजय यादव की ओर से बॉक्सिंग खेल में दी गई सेवाओं के मद्देनजर उन्हें टीम का कोच नियुक्त किया गया है। वह प्रदेश व देश के लिए बॉक्सर व रेफरी के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
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मूलत: सरकाघाट के गैहरा गांव के रहने वाले डॉ. संजय यादव वर्ष 1997 से 2009 तक अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में कुश्ती, जूडो और बॉक्सिंग में आठ बार प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

देश को दिलाए कई पदक

Sanjay Yadav Become Coach of Kick boxing Organization India senior team.

1999 में उन्होंने चंडीगढ़ में आयोजित अंतर विश्वविद्यालय कुश्ती प्रतियोगिता में प्रदेश को रजत पदक दिलाया। 2005 में उन्हें कुश्ती के क्षेत्र में हिमाचल केसरी के खिताब से सम्मानित किया गया। उन्होंने 2009-10 में सीनियर नेशनल वुशु प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्रदेश की झोली में डाला, जबकि 2010 में मार्शल आर्ट की विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में भारत के लिए रजत पदक हासिल किया।

इसके अलावा 2011 में हांगकांग में हुई अंतरराष्ट्रीय वुशु प्रतियोगिता में कांस्य पदक देश के लिए जीता। वर्ष 2012 में हिमाचल दिवस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें परशुराम अवार्ड से नवाजा। उसी दिन डॉ. संजय यादव ने खेलों से सन्यास ले लिया। लेकिन प्रशिक्षक के रूप में कई खिलाड़ियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा चुके हैं। वर्तमान में डॉ. संजय यादव मंडी जिला के रावमापा पैड़ी में शारीरिक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उनके पिता भीखम राम पहलवान है।

शारीरिक शिक्षा में की है पीएचडी
अमर उजाला से बातचीत में यादव ने बताया कि इस मुकाम पर पहुंचना आसान नहीं था। इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की है। रावमापा थौना से 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद हिमाचल विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर की तथा एमफिल में गोल्ड मेडल हासिल किया। वहीं से पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कामयाबी का श्रेय माता-पिता, पत्नी वंदना यादव व भाई जगदीश पहलवान को देते हैं।

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