10 किमी पैदल चलकर पहुंचता था स्कूल, आज सेना में बना लेफ्टिनेंट
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अगर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिलें खुद-ब-खुद आपकी तरफ चली आती हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है संदीप ने। हिमाचल के सिरमौर जिले के विकास खंड नाहन की पराड़ा पंचायत के मलाहन गांव के संदीप ने भारतीय सेना में भी अपनी काबलियत का लोहा मनवा दिया है।
30 जुलाई को आईएमए देहरादून के चैटवुड हाल में परेड की सलामी के साथ कमीशन हासिल किया। इसके साथ ही वे लेफ्टिनेंट बन गए हैं। साल 2001 में संदीप भारतीय सेना में बतौर जवान भर्ती हुए। घर की आर्थिक तंगी के बीच संदीप ने 10वीं तक शिक्षा हासिल की थी।
घर के हालात सही न होने के कारण न चाहते हुए भी आर्मी में जाना पड़ा। घने जंगलों से होकर गुजरने वाले रास्ते पर करीब 10 किलोमीटर का सफर पैदल तय तक संदीप ने बेचड़ का बाग स्कूल से 10वीं की पढ़ाई पूरी की। 11वीं कक्षा में प्रवेश के बाद ही संदीप सेना में भर्ती हो गया।
सेना में कार्यरत रहते हुए की +2, ग्रेजुएशन और बीएड
सेना में कार्यरत रहते हुए संदीप ने अपनी पढ़ाई के दम पर बड़ी सफलता हासिल करने की ठानी। सेना में रहते हुए ही संदीप ने जमा दो, एचपीयू शिमला से बीए व जम्मू कश्मीर से बीएड किया। भारतीय सेना में बतौर जवान 15 साल की सेवा के बाद संदीप कमीशन भी हासिल करने में सफल हो गए। संदीप की इस उपलब्धि से जिला सिरमौर के सैनधार क्षेत्र के लोग काफी गर्व महसूस कर रहे हैं। सैनधार क्षेत्र का संदीप पहला बेटा है जो सेना में लेफ्टिनेंट बना।
माता कौशल्या देवी ने पहनाए सितारे
30 जुलाई को भारतीय मिलिट्री अकादमी देहरादून में लेफ्टिनेंट संदीप की माता कौशल्या देवी ने सितारे पहनाए। इस दौरान उनके मामा रुप सिंह व पत्नी सुमनलता भी उनके साथ थे। 21 अक्तूबर 1984 को जन्मे संदीप के पिता टीकाराज का इसी साल स्वर्गवास हो चुका है। अमर उजाला से बातचीत में लेफ्टिनेंट संदीप ने बताया कि सेना में रहते हुए ही उन्होंने एसएल के माध्यम से कमीशन प्राप्त किया है। संदीप ने बताया कि वह अब जम्मू कश्मीर में इंफेंटरी विंग में अपनी सेवाएं देंगे।