शिलाई की राधा को यंग वुमन साइंटिस्ट अवार्ड, रिसर्च के लिए जर्मनी से बुलावा
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शिलाई की बेटी को नौणी विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यंग वुमन साइंटिस्ट अवार्ड से अलंकृत किया गया है। वर्तमान में राधा शूलिनी विवि से बॉटनी में पीएचडी कर रही हैं। राधा की रिसर्च से प्रभावित जर्मनी के वैज्ञानिकों ने उन्हें जर्मनी बुलाया है।
रिसर्च के दौरान राधा ने चूड़धार के जंगलों में घुमंतू गुज्जरों के साथ समय व्यतीत किया। दुर्गम व विकट परिस्थितियों में गुज्जर स्वयं व पशुओं को बीमारी से कैसे बचाते हैं? ऐसी कौन-सी जड़ी बूटियां हैं, जिनके प्रयोग से वे अस्वस्थ नहीं होते।
राधा इसका शोध कर रही हैं। वह शिलाई उपमंडल की बालीकोटी पंचायत के गांव बोबरी की रहने वाली है और साधारण परिवार से संबंध रखती हैं। पिता जातीराम नेगी स्वास्थ्य विभाग से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं। माता विद्या देवी शिलाई में दुकान चलाती हैं।
राधा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च से जुड़े 19 पेपर प्रकाशित हो गए हैं। छह पेपर प्रकाशनार्थ तैयार हैं। उन्होंने सफलता का श्रेय माता को दिया है। बताया कि वह प्रयोगशाला में जाकर 26 घंटे शोध करती हैं। उन्होंने गाइड प्रोफेसर सुनील पुरी और पीके खोसला को मार्गदर्शक बताया है।
कामयाबी पर मां विद्या के छलके आंसू
राधा की कामयाबी पर माता विद्या देवी के खुशी के आंसू छलक पड़े। चार भाई बहनों में राधा तीसरे नंबर पर हैं। इनकी माता विद्या देवी ने बताया कि दसवीं कक्षा पास होने पर राधा ने मेडिकल साइंस में प्रवेश की जिद पिता से की तो उन्होंने पढ़ाई का खर्च वहन न कर पाने की बात कही। एक दिन राधा ने अपनी मां से मेडिकल साइंस में पढ़ने की अपनी जिद पूरी करवा ली।
वह बेटी की फीस के लिए दिन-रात काम करती रहीं। पति की पेंशन इतनी कम थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलना असंभव था। बेटी की पढ़ाई के लिए विद्या देवी ने शिलाई स्थित मकान को किराये पर दिया। एक दुकान भी खोली।