मिसाल बने पारस, इंजीनियर की नौकरी छोड़ फ्री में पढ़ाते हैं केमिस्ट्री
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प्रदेशभर के बच्चे अब ऑनलाइन केमिस्ट्री की निशुल्क पढ़ाई भी कर सकेंगे। जी हां, यह संभव हुआ है इंजीनियर पारस ठाकुर के प्रयासों से। मंडी के रहने वाले पारस ठाकुर बच्चों को यू ट्यूब के जरिये केमिस्ट्री का ज्ञान बांट रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से पारस इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 5 से 6 लाख रुपये पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी। पारस ठाकुर ने यू ट्यूब केनवस क्लासिज नाम से एक सॉफ्टवेयर बनाया है।
वह यू ट्यूब पर बच्चों से केमिस्ट्री के प्रश्न पूछते हैं और उनके जवाब देते हैं। उन्होंने 170 वीडियो अपलोड किए हैं, जिनमें स्टैंडर्डाइज मैटीरियल अपलोड किया, जिसमें केमिस्ट्री का कनसेप्ट समझाने का प्रयास किया गया है।
इस वजह से छोड़ दी इंजीनियरिंग की नौकरी
अमर उजाला से खास बाचतीत में इंजीनियर पारस ठाकुर ने बताया कि उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल हमीरपुर से वर्ष 2005 में जमा दो साइंस विषय में की। इसके बाद उन्होंने एनआईटी हमीरपुर से मेकेनिकल विषय में बीटेक की।
बीटेक की पढ़ाई के दौरान भी वह करीब दो साल तक हमीरपुर में निर्धन बच्चों को निशुल्क कोचिंग देते रहे। बीटेक करने के बाद वह मर्चेंट नेवी में बतौर इंजीनियर चले गए। लेकिन एजूकेशन और टीचिंग सेक्टर में गहरी रुचि के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने कोटा, गुजरात और हैदराबाद समेत देशभर के नामी शिक्षण संस्थानों में शिक्षण कार्य किया।
ऐसे हुए मोदी के भाषण से इंस्पायर
पारस बताते हैं कि एक दिन उन्होंने टेलीविजन पर प्रधानमंत्री का भाषण सुना जिसमें उन्होंने देशहित में कम से कम एक साल सेवाएं प्रदान करने की बात सुनी। इसी के चलते वह नौकरी छोड़ कर अब यू ट्यूब पर केमिस्ट्री का ज्ञान बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई का तरीका सही नहीं है। अगर स्कूलों में बेसिक ज्ञान बेहतर तरीके से प्रदान किया जाए तो कोई भी बच्चा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रह सकता।
दसवीं से 12वीं के बच्चों को पढ़ा रहे पारस
पारस ठाकुर ने बताया कि वह वर्तमान में यू ट्यूब के जरिये दसवीं से लेकर 12वीं कक्षा तक पढ़ा रहे हैं। लेकिन आने वाले समय में वह छठी से लेकर 12वीं तक शिक्षा प्रदान करेंगे। इसके अलावा गांव-गांव में प्रोजेक्टर के माध्यम से भी बच्चों को केमिस्ट्री पढ़ाने की योजना है। पारस के पिता तेजेंद्र सिंह ठाकुर सरकारी कॉलेज से प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। जबकि माता सुनीता ठाकुर वर्तमान में भी बतौर टीचर सेवाएं प्रदान कर रही हैं।