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जनजातीय जिले के लाल ने बनाया ऐसा कीर्तिमान, आप भी करेंगे सलाम

Fri, 02 Dec 2016 12:08 PM IST
अशोक राणा/अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति)
अशोक राणा/अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति) Updated Fri, 02 Dec 2016 12:08 PM IST
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Jigmed selected as a lieutenant in Indian Navy

जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के एक युवक की कामयाबी ने पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। केलांग से सटे बीलिंग गांव के जिगमेद दोरजे अब नेशनल डिफेंस अकादमी देहरादून में ट्रेनिंग लेने के बाद भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट बनकर देश की सेवा करेगा। जिगमेद लाहौल स्पीति के पहले एनडीए की परीक्षा पास करने वाले युवा हैं।

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जिगमेद के लिए यह इसीलिए भी एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इस परीक्षा में किसी भी वर्ग के लिए आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। लिहाजा इस परीक्षा को पास करने के लिए देशभर के होनहारों से कड़ी चुनौती के बाद ही कामयाबी मिल पाती है। जिगमेद ने दसवीं और जमा दो की परीक्षा डीएवी चंडीगढ़ से प्रथम श्रेणी में पास की है।
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एनडीए में शामिल होने से पहले वह तीन माह तक थापर इंजीनियरिंग कॉलेज में बतौर मेकेनिकल इंजीनियरिंग का छात्र रहा। इसी बीच एनडीए में चयन हो गया। एनडीए में 4 साल का प्रशिक्षण पूरा कर अब वह देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी ज्वाइन करने जा रहे हैं। देहरादून में एक साल प्रशिक्षण लेने के बाद वह भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल होंगे।
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जिगमेद के पिता नोरबू छेरिंग स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में वरिष्ठ प्रबंधक हैं। जबकि माता निर्मला गृहिणी हैं। पिता नोरबू ने कहा कि वह अपने बेटे की कामयाबी से बेहद खुश हैं। उन्होंने इसका पूरा श्रेय टीचरों के साथ अपनी धर्मपत्नी निर्मला को दिया। निर्मला देवी ने कहा कि जिगमेद ने आज पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

दुनिया में कुछ असंभव नहीं

Jigmed selected as a lieutenant in Indian Navy

जिगमेद का कहना है कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। बशर्ते इंसान अपने लक्ष्य से न भटके और ईमानदारी से मेहनत करता रहे। सर्दियों में 6 महीने तक बर्फबारी के कारण दुनिया से अलग थलग रहने वाले लाहौल जैसे इलाके के युवा का एनडीए में कामयाब होना सच में एक बड़ी उपलब्धि है। 

जिगमेद का कहना है कि कड़ी मेहनत और सच्ची लगन से बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। भारतीय सेना में शामिल होना उनके लिए गौरव की बात है। जिगमेद ने अपनी कामयाबी का श्रेय स्कूल टीचरों के साथ अपने माता-पिता और रिश्तेदारों को दिया।

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