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लोक गीतों की रचना के साथ गायकों को धुन भी दे रहे हैं हरिकिशन

Mon, 23 Sep 2019 01:14 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 23 Sep 2019 01:14 PM IST
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himachali folk singer harikishan verma success story shimla himachal pradesh
- फोटो : अमर उजाला

लोक गायकी में गीतकारों की भी अहम भूमिका रहती है। बेशक उनका काम परदे के पीछे ही रहता हो। पहाड़ी बोली के ऐसे ही एक गीतकार हरिकिशन वर्मा हैं। हरिकिशन केवल लोकगीतों की रचना ही नहीं करते, बल्कि वह लोक गायकों को धुन बनाकर भी देते हैं। अब तक वह 600 से ज्यादा पहाड़ी लोकगीत लिख चुके हैं। 

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लोक गायक कुलदीप शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, राजीव शर्मा, किशन वर्मा, दलीप सिरमौरी, केएल सिंगटा, रघुवीर सिंह जैसे लोक गायक उनके लिखे गीतों और उनकी दी धुन पर अपना नाम कमा चुके हैं। हरिकिशन वर्मा के अनुसार उनका अब तक का अपना लिखा सबसे हिट लोकगीत ‘ठंडा पानी दे पिलाए रामप्यारी ए, तेरे देशे मरै गरमिए’ रहा है। इसे लोक गायक राजीव शर्मा ने गाया है।
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सोशल मीडिया पर इसके आडियो को ही 60 लाख बार सुना जा चुका है। लोक गायक कुलदीप शर्मा का ‘घुट-घुट म्हारै चाय रा लाणा बिमला तेरे होटले’ भी खूब सुना जा रहा है। सुरेंद्र शर्मा के ‘सभी बांडी खुशी दुनिया रै नारणै’, ‘छोटी धारअ पांदअरी प्यारी’ जैसे लोकगीत भी खूब सुने गए हैं। हरिकिशन का घर शिमला की निक टवर्ती पंचायत टियाली के करियाली गांव में है। वह अपनी पंचायत के उपप्रधान भी हैं। 
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फेयर कॉपियों में लिखते थे लोकगीत, शिक्षकों की डांट खाते थे 
हरिकिशन आठवीं में पढ़ते थे तो फेयर कॉपियों में शायरी और लोकगीत लिखते रहते थे। इसके लिए शिक्षकोें की डांट भी खा जाते थे। लोकगीतों को लिखने के लिए गुरु विद्यानंद सरैक को मानते हैं, मगर गीतों को सरल तरीके से लिखने का हुनर लायक राम रफीक से सीखा। 


सौगंध खाई कि नशे को प्रोत्साहित करने को कुछ नहीं लिखेंगे 
लोकगायक हरिकिशन ने सौगंध खाई है कि वह शराब या अन्य नशे को प्रोत्साहित करने से संबंधित लोकगीत नहीं लिखेंगे। उन्हें एक लोकगीत को लिखने के चार से पांच हजार रुपये मिल जाते हैं।

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