आशीष को सलाम, अंधेपन को मात देकर बने बैंक अधिकारी
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कहते हैं कि कुछ करने का अगर जुनून हो तो कोई भी चीज आपका रास्ता नहीं रोक सकती। बचपन से नेत्रहीन आशीष परमार 23 वर्ष की उम्र में प्रोबेशन अफसर की परीक्षा उत्तीर्ण कर बैंक में अधिकारी बन गए हैं।
दोनों आंखों की रोशनी से महरूम आशीष परिवार पर आश्रित होने के बजाय उनका सहारा बन गए हैं। आईबीपीएस की ओर से नवंबर 2015 में आयोजित बैंक पीओ की परीक्षा उत्तीर्ण कर आशीष का चयन पंजाब एंड सिंध बैंक में हुआ।
लंबी चयन प्रक्रिया के बाद इसी वर्ष अगस्त में दिल्ली में ज्वाइनिंग दी। सोमवार को उन्होंने हमीरपुर स्थित बैंक की शाखा में कार्यभार संभाल लिया है। आशीष ने आठवीं तक की शिक्षा देहरादून स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर विजुअल हैंडीकैप्ड से ली।
दिल्ली पब्लिक स्कूल आरकेपुरम से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। सामान्य बच्चों वाले दिल्ली के हिंदू कॉलेज से आशीष ने वर्ष 2014 में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने आईबीपीएस के माध्यम से पीओ की परीक्षा पास की। आशीष अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता, रिश्तेदार लवलेश कटोच और कॉलेज प्रवक्ता अमन कुमार को देते हैं।
कंप्यूटर के मास्टर हैं आशीष, नेत्रहीन बहन भी बैंक में करती हैं काम
नेत्रहीन होने के बावजूद हमीरपुर के मौंही गांव के आशीष कंप्यूटर-लैपटॉप पर बड़ी आसानी से काम कर लेते हैं। वे एक विशेष तरह के सॉफ्टवेयर से सामान्य लोगों की तरह हर काम कर लेते हैं। कंप्यूटर पर हर काम देखने के बजाय लीड के जरिये सुनकर करते हैं। उन्होंने कंप्यूटर कोर्स भी किया है। आशीष ने बताया कि ऐसा कोई काम नहीं है जो वह कंप्यूटर पर नहीं कर सकता है।
नेत्रहीन बहन भी बैंक में करती हैं काम
आशीष ने बताया कि वर्ष 2007 में जब नौवीं कक्षा में पढ़ता था तो उनकी माता माया परमार का देहांत हो गया। पिता ने ही उसकी देखरेख कर कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी करवाई। आशीष की बड़ी बहन विजेता परमार भी नेत्रहीन हैं। वे दिल्ली में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी कर रही हैं। आशीष के पिता एचएल परमार राज्य विद्युत बोर्ड से एसडीओ के पद से सेवानिवृत्त हैं।