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वीडियो: ज्योतिका बोली, सरकार मदद करे तो ओलंपिक से लाऊंगी पदक
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 02 Sep 2018 05:10 PM IST
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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए कई मेडल जीत चुकीं ज्योतिका दत्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। उनका कहना है प्रदेश सरकार से उन्हें न तो किसी तरह की वित्तीय मदद जा रही है और न ही खेल कोटे में नौकरी की व्यवस्था की गई है। सरकार मदद करे तो वे ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाएंगी।
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इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में हालांकि तलवारबाजी में वे कोई मेडल नहीं जीत पाईं, लेकिन अपनी रैंकिंग में जरूर सुधार किया है। इस बार उनकी रैंकिंग 10 से छठे स्थान पर पहुंच गई है। ज्योतिका शिमला जिले के रोहड़ू के बनछूना गांव की रहने वाली हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि ओलंपिक में पदक लाना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि आज तक प्रोत्साहन के नाम पर प्रदेश सरकार से उन्हें कुछ नहीं मिला है।
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ज्योतिका ने कहा कि वे महाराष्ट्र के सोलापुर में वरिष्ठ वर्ग के राष्ट्रीय मुकाबले में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। जू्नियर कॉमनवेल्थ मुकाबले में रजत पदक जीता है। वरिष्ठ वर्ग में रजत और कांस्य पदक जीते हैं। एशियन मुकाबलों में ज्योतिका एशिया रैंकिंग में नंबर वन हांगकांग की कांग से क्वार्टर फाइनल में हारी थीं।
इससे पहले ज्योतिका में इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, फिलिपिंस, कोरिया और लेबनान के खिलाड़ियों को लीग वन में हराया था। वर्तमान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स पटियाला में प्रशिक्षण ले रही हैं।
अपने खर्च पर बार-बार नहीं जा सकते खिलाड़ी
ज्योतिका दत्ता कहती हैं कि केंद्र सरकार साल में दो बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेने के लिए भेजती है, जबकि अन्य देशों के खिलाड़ी साल में आठ से दस मुकाबले खेलने जाते हैं। उन्हें विदेशों में खेलने के कम मौके मिलते हैं। खिलाड़ी अपने खर्च पर बार-बार नहीं जा सकते।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की खिलाड़ी भवानी देवी को वहां की सरकार वित्तीय मदद के साथ कई प्रकार की सुविधाएं देती है। उनका कहना है कि विदेशी कोचों से प्रशिक्षण की व्यवस्था हो तो वे अपने प्रदर्शन में और सुधार कर सकती हैं। सरकार नौकरी में उनके लिए खेल कोटे में कोई आरक्षण नहीं देती है।