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पहले प्रयास में IFS बना किसान का बेटा, विजिटर कुर्सी पर बैठकर करते हैं काम

Mon, 27 Jun 2016 10:10 AM IST
प्रवीण कुमार/अमर उजाला, हमीरपुर
प्रवीण कुमार/अमर उजाला, हमीरपुर Updated Mon, 27 Jun 2016 10:10 AM IST
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Farmer's Son IFS Dr Nitin Patil Cracked IFS exam in first attempt
डा. नितिन पाटिल वन्य जीव संरक्षण विभाग हमीरपुर के डीएफओ बने हैं। - फोटो : अमर उजाला

महाराष्ट्र के कोलापुर के रहने वाले किसान के बेटे डा. नितिन पाटिल वन्य जीव संरक्षण विभाग हमीरपुर के डीएफओ बने हैं। 25 वर्षीय डा. नितिन का कहना है कि उन्हें अफसर नहीं बल्कि एक सेवक के तौर पर काम करना है। शनिवार को जब अमर उजाला की टीम उनके कार्यालय में पहुंची तो वह डीएफओ की कुर्सी पर नहीं बल्कि विजिटर कुर्सी पर बैठकर कामकाज कर रहे थे।

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उनका कहना है कि जब अधिकारी और जनता के बीच का फासला कम होगा तो काम में पारदर्शिता आएगी और हर काम तेजी से हो पाएगा। डा. नितिन के परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं। माता-पिता अपनी करीब सात एकड़ जमीन पर खेतीबाड़ी कर गुजर-बसर करते हैं।

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नागपुर और देहरादून में हासिल किया प्रशिक्षण

Farmer's Son IFS Dr Nitin Patil Cracked IFS exam in first attempt

वर्ष 2006 में सरकारी स्कूल से विज्ञान संकाय में बारहवीं उत्तीर्ण करने के बाद नितिन ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से संचालित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा के आधार पर पुणे स्थित वेटरनरी कॉलेज से बीएससी वेटरनरी साइंस में डॉक्टरी की पढ़ाई की।

इसके बाद वर्ष 2013 में बरेली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वेटरनरी साइंस एंड रिसर्च से स्नातकोत्तर किया। इसी बीच नितिन ने यूपीएससी की परीक्षा भी दी। यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नितिन का चयन आईएफएस में हो गया।

नागपुर और देहरादून स्थित इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट अकादमी से प्रशिक्षण हासिल करने के बाद नितिन ने हिमाचल कैडर लिया। नाहन में चार माह का प्रोबेशन पीरियड खत्म करने के बाद डा. नितिन पाटिल ने अब हमीरपुर के वन्य जीव संरक्षण विभाग में बतौर डीएफओ ज्वाइन किया है।

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