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बुलंद हौसलों से पस्त हुए हालात, हर कोई बोला- बेटी हो तो अनामिका जैसी

Thu, 11 Jan 2018 12:17 PM IST
अमर उजाला, जितेंद्र ठाकुर, जोगिंद्रनगर (मंडी)
अमर उजाला, जितेंद्र ठाकुर, जोगिंद्रनगर (मंडी) Updated Thu, 11 Jan 2018 12:17 PM IST
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Divyang Anamika Topper in CBSE NET Exam
Anamika

न तो वह बोल पाती है और न सुन सकती है। लेकिन, बुलंद हौसलों और मेहनत से वह अक्षमता को भी मात दे देती है। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है।

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हिमाचल के जिला मंडी के जोगिंद्रनगर के वार्ड नंबर एक की अनामिका ने फाइन आर्ट में सीबीएसई की ऑल इंडिया लेवल की नेट परीक्षा की दिव्यांग श्रेणी में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया है। 
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अनामिका के पति सलिल सूद भी मूक बधिर हैं। लेकिन एक-दूसरे के प्रति प्यार और विश्वास की कामयाब कहानी दूसरों की प्रेरणा स्रोत बन गई है।

परिणय सूत्र में बंधने के बाद दोनों ने एक दूसरे को न केवल सहारा दिया, बल्कि एक-दूसरे का आत्मविश्वास भी जगाया। सलिल सूद वर्तमान में चंडीगढ़ में निजी कपनी के बड़े ओहदे पर सेवा दे रहे हैं।

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अक्षमता को मात देकर दोनों बने प्रेरणा स्रोत

Divyang Anamika Topper in CBSE NET Exam

ससुर अनुज सूद और सास सारिका सूद ने बहू की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उनका बेटा सलिल सूद भी दिव्यांग है और आजकल वह चंडीगढ़ में नौकरी कर रहा है। कुछ वर्ष पूर्व ही दोनों की शादी हुई थी। दोनों ही सुनने और बोलने में अक्षम हैं।

लेकिन, अपने सपनों को साकार करने में अक्षमता को भी दोनों ने मात देकर अन्य बच्चों के लिए भी वे प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करते रहे हैं।

अनामिका ने कभी भी अपने सपनों के आगे दिव्यांगता को बाधा नहीं बनने दिया। बल्कि उसने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। अपने ससुराल और मायके का सिर गर्व से ऊंचा किया है।

धर्मशाला संग्रहालय में सजीं कई प्रदर्शनियां

Divyang Anamika Topper in CBSE NET Exam

अनामिका बचपन से काफी तेज थी। उसने जिंदगी की चुनौतियों को सहर्ष स्वीकार किया और अपनी पढ़ाई को जारी रखते हुए अधिकांश विषय में टॉप किया है। पोस्ट ग्रेजुएट अनामिका इस समय पेंटिंग कर अपना समय व्यतीत कर रही है।

उसकी पेंटिंग की कई प्रदर्शनियां जिला संग्रहालय धर्मशाला में लगी हुई हैं। अनामिका की माता अनीता और पिता अनिल ने कहा कि अनामिका कभी भी किसी पर निर्भर नहीं रहती और अपना सारा कार्य वह स्वयं ही पूरा करती है। वह परिवार का सहारा बनकर एक बेटे की भूमिका निभाना चाहती है।

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