कुश्ती ही नहीं, अभिनय में भी 'सुल्तान' बन गया है शिमला का ये कलाकार
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कहते हैं कि अगर आपमें आगे बढ़ने की चाहत हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिला शिमला के एक छोटे से गांव भलावग (आलमपुर) के रहने वाले धीरेंद्र सिंह रावत ने।
'ऑल इज वेल' और 'तमाशा' जैसी फिल्मों में अभिनय कर चर्चा में आए रावत का कलाकार बनने का सफर आसान नहीं था। शुरुआत एक पहलवान के रूप में हुई और स्कूल व कॉलेज स्तर पर कुश्ती में स्टेट और नेशनल लेवल के पहलवानों को हराकर कई खिताब अपने नाम किए।
लेकिन कुश्ती में करिअर बनाने की बजाए साल 2006 में थिएटर की राह चुनी। इसके लिए बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर की वर्कशॉप में अभिनय सीखना शुरू किया। बाद में केदार ठाकुर और मनीष शर्मा के निर्देशन में कई नाटक किए।
कोटशेरा से की शुरुआत, अब चमकाएंगे हिमाचल का नाम
साल 2006 में ही रावत के कला भारतीय ड्रामा संस्कृति मंच ने कोटशेरा कॉलेज के लिए बिलासपुर में हुए यूथ फेस्टिवल में गोल्ड मेडल जीता। यही नहीं, यह रावत की टीम ही थी जिसने तीन साल से गेयटी थिएटर में हो रहे नेशनल फेस्टिवल में पहली बार इस साल हिमाचल की ओर से किसी नाटक का मंचन किया।
थिएटर में इनके अच्छे अभिनय को देखते हुए इन्हें दो फिल्मों काम का भी मौका मिला। '36 रानियों का राजा' और 'डेथ ऑफ सेल्समैन' जैसे नाटकों के लिए सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर चुके रावत का केबीडीएस मंच अब भोपाल में होने जा रहे नेशनल यूथ फेस्टिवल में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है।
बीएड के बाद राजनीति शास्त्र में एमए कर चुके रावत का कहना है कि उनकी टीम इस प्रतियोगिता में प्रदेश का नाम चमकाने के लिए तैयार है। रावत ओपन गेयटी थिएटर में भी अपने नाटकों के जरिए नशे से दूर रहने और बेटी बचाओ का संदेश देते रहे हैं।