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साहित्य-संस्कृति को सक्रिय करने की जरूरत : वीरभद्र
Shimla
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
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शिमला। साहित्य एवं संस्कृति विभाग ने रविवार को बचत भवन में साहित्यिक सम्मान समारोह करवाया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। विशेष अतिथि के तौर पर चर्चित साहित्यकार, कथाकार तथा बया पत्रिका के संपादक गौरीनाथ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें साहित्यकारों के बीच उपस्थित होने में हमेशा प्रसन्नता महसूस होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निष्क्रिय हो रही साहित्य तथा संस्कृति को सक्रिय करने की आवश्यकता है।
प्रदेश सरकार साहित्यिक तथा सांस्कृतिक वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ साहित्यकार तथा आलोचक श्रीनिवास श्रीकांत को साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए आजीवन उपलब्धि सम्मान से सम्मानित किया और उनकी दो पुस्तकों ‘कथा त्रिकोण’ तथा ‘आदमी की दुनिया का दिन’ का विमोचन किया। कथा त्रिकोण जहां एक आलोचना पुस्तक है, तो वहीं आदमी की दुनिया का दिन साहित्यिक कविता है। इस दौरान श्रीनिवास श्रीकांत ने ‘कागजी जहाजों का जाने कैसा मंजर है’ तथा ‘अब नहीं आते परिंदे बस्तियों के पास’ गजलेेें गाकर सभी उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर श्रीनिवास श्रीकांत की पत्नी निर्मल शर्मा, उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा, पुलिस अधीक्षक डीडब्लयू नेगी, वरिष्ट साहित्यकार, कवि तथा आलोचक डा. हेमराज कौशिक, सुदर्शन विशिष्ट, जगदीश राणा, सरोज विशिष्ट, संस्था के अध्यक्ष एसआर हरनोट भी मौजूद रहे।
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प्रदेश सरकार साहित्यिक तथा सांस्कृतिक वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ साहित्यकार तथा आलोचक श्रीनिवास श्रीकांत को साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए आजीवन उपलब्धि सम्मान से सम्मानित किया और उनकी दो पुस्तकों ‘कथा त्रिकोण’ तथा ‘आदमी की दुनिया का दिन’ का विमोचन किया। कथा त्रिकोण जहां एक आलोचना पुस्तक है, तो वहीं आदमी की दुनिया का दिन साहित्यिक कविता है। इस दौरान श्रीनिवास श्रीकांत ने ‘कागजी जहाजों का जाने कैसा मंजर है’ तथा ‘अब नहीं आते परिंदे बस्तियों के पास’ गजलेेें गाकर सभी उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर श्रीनिवास श्रीकांत की पत्नी निर्मल शर्मा, उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा, पुलिस अधीक्षक डीडब्लयू नेगी, वरिष्ट साहित्यकार, कवि तथा आलोचक डा. हेमराज कौशिक, सुदर्शन विशिष्ट, जगदीश राणा, सरोज विशिष्ट, संस्था के अध्यक्ष एसआर हरनोट भी मौजूद रहे।
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