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घर बैठे देख सकेंगे जमीन के खसरा नंबर
Shimla
Updated Mon, 11 Aug 2014 05:30 AM IST
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के किसानों, बागवानों और भू-स्वामियों के लिए अच्छी सूचना है। प्रदेश के आठ जिलों में जमीनों का रिकार्ड पूरी तरह से डिजिटल होने जा रहा है। इसके तहत आप घर बैठे इंटरनेट पर खसरा नंबर डालकर अपनी जमीन के बारे में पता कर सकते हैं। डिजिटाइजेशन के लिए प्रदेश सरकार की ओर से टेंडर जारी कर दिया गया है। सरकार ने कंपनियों से 16 अगस्त तक टेंडर के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
सरकार की ओर से गांव, तहसील और जिले स्तर पर राजस्व रिकार्ड को ऑनलाइन किया जा रहा है। किसी भी गांव का व्यक्ति अपने खेत और बगीचे का मानचित्र कंप्यूटर पर घर बैठे देख सकता है। उन्हें जमीन का रिकार्ड लेने के लिए या मानचित्र देखने के लिए राजस्व कर्मियों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रदेश सरकार की ओर से इसकी घोषणा काफी पहले की जा चुकी थी, लेकिन इसका प्रदेश के आठ जिलों में धरातल पर क्रियान्वयन अब शुरू किया जा रहा है। जनता की सहूलियत के लिए सरकार की ओर से यह कदम उठाया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले तीन से चार माह के भीतर प्रदेश के आठ जिलों का राजस्व रिकार्ड पूरी तरह डिजिटलाइज होकर तैयार हो जाएगा।
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इनसेट - 1
इन जिलों का बनेगा डिजिटल मैप
बिलासपुर, कुल्लू, लाहौल स्पीति, सोलन, कांगड़ा, शिमला, किन्नौर और ऊना
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इनसेट - 2
लोगों को क्या होगा लाभ
-सूबे में राजस्व रिकार्ड सुरक्षित होंगे
-गड़बड़ी करने की आशंका कम होगी
-राजस्व रिकार्ड आसानी से उपलब्ध होगा
-दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे
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कोट -
हिमाचल प्रदेश ने आठ जिलों के राजस्व रिकार्ड को डिजिटल करने के लिए पांच अगस्त को टेंडर कर दिया गया है। टेंडर फाइनल करने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अगले तीन माह के भीतर आठ जिलों का रिकार्ड पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगा। - तरुण श्रीधर, प्रधान सचिव राजस्व
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सरकार की ओर से गांव, तहसील और जिले स्तर पर राजस्व रिकार्ड को ऑनलाइन किया जा रहा है। किसी भी गांव का व्यक्ति अपने खेत और बगीचे का मानचित्र कंप्यूटर पर घर बैठे देख सकता है। उन्हें जमीन का रिकार्ड लेने के लिए या मानचित्र देखने के लिए राजस्व कर्मियों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रदेश सरकार की ओर से इसकी घोषणा काफी पहले की जा चुकी थी, लेकिन इसका प्रदेश के आठ जिलों में धरातल पर क्रियान्वयन अब शुरू किया जा रहा है। जनता की सहूलियत के लिए सरकार की ओर से यह कदम उठाया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले तीन से चार माह के भीतर प्रदेश के आठ जिलों का राजस्व रिकार्ड पूरी तरह डिजिटलाइज होकर तैयार हो जाएगा।
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इनसेट - 1
इन जिलों का बनेगा डिजिटल मैप
बिलासपुर, कुल्लू, लाहौल स्पीति, सोलन, कांगड़ा, शिमला, किन्नौर और ऊना
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इनसेट - 2
लोगों को क्या होगा लाभ
-सूबे में राजस्व रिकार्ड सुरक्षित होंगे
-गड़बड़ी करने की आशंका कम होगी
-राजस्व रिकार्ड आसानी से उपलब्ध होगा
-दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे
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कोट -
हिमाचल प्रदेश ने आठ जिलों के राजस्व रिकार्ड को डिजिटल करने के लिए पांच अगस्त को टेंडर कर दिया गया है। टेंडर फाइनल करने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अगले तीन माह के भीतर आठ जिलों का रिकार्ड पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगा। - तरुण श्रीधर, प्रधान सचिव राजस्व
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