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हिमाचल में क्यों जान गंवा रहे पर्यटक
Shimla
Updated Tue, 17 Jun 2014 05:32 AM IST
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शिमला। हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में पर्यटक क्यों जान गंवा रहे हैं, ये सवाल इसलिए क्योंकि पिछले 9 दिनों में दो बड़े हादसे यहां पर्यटकों के साथ ही हुए हैं। पहले 8 जून की शाम लारजी हादसे में हैदराबाद के 25 पर्यटकों की जान चली गई, तो अब 16 जून की शाम को सिरमौर जिला में पर्यटकों से भरी बस मौत की खाई में समा गई।
इन हादसों से हिमाचल के पर्यटन को नुकसान होना तय है। पूरे देश में ऐसे हादसों की चर्चा हो रही है। गर्मियाें में छुट्टियां बिताने निकले पर्यटक यहां जान खो रहे हैं। दोनों हादसों में पर्यटन सुविधाओं और सूचनाओं की कमी भी सबके सामने है। लारजी हादसे में डैम से पानी छोड़ने से पहले कोई वार्निगिं सिस्टम या सूचना पट्ट न होना भी दुर्घटना का कारण बना तो दूसरी ओर सिरमौर में भी 55 सीटर बड़ी बस कैसे सिंगल रोड पर चली गई, ये बड़ा सवाल है। क्या रेणुका से पांवटा के शार्टकट को पकड़ने से पहले पर्यटकों को ये जानकारी देने की कोई व्यवस्था थी कि वे इतनी बड़ी बस को वन-वे रोड पर ले जा सकते हैं या नहीं?
हिमाचल को इस हादसों से सबक लेना होगा। हर साल ढाई करोड़ की पर्यटकों की आवभगत का दावा करने वाले हिमाचल में ऐसे हादसे पर्यटन के भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं। पर्यटन सीजन से पहले सभी प्रबंधों और व्यवस्थाओं की समीक्षा करने की जरूरत है। पहाड़ पर कौन सी सड़कें मैदानों से आने वाले पर्यटकों और चालकों के लिए ठीक हैं और कौन सी नहीं हैं, इसके सूचना पट्ट होने चाहिए।
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इनसेट
बड़ी बस के लिए नहीं थी ये सड़क
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने इस हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि वह सारी सूचनाएं मंगवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस सड़क पर हादसा हुआ, वह बड़ी बस के लिए नहीं थी। लगता है कि शार्टकट के चक्कर में ड्राइवर ने ये सड़क पकड़ ली। बाली ने कहा कि हिमाचल के पर्यटन के लिए ये हादसे ठीक नहीं हैं। राहत कार्यों के आदेश दे दिए गए हैं और सरकार प्रभावितों को हरसंभव सुविधा उपलब्ध करवाएगी।
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इन हादसों से हिमाचल के पर्यटन को नुकसान होना तय है। पूरे देश में ऐसे हादसों की चर्चा हो रही है। गर्मियाें में छुट्टियां बिताने निकले पर्यटक यहां जान खो रहे हैं। दोनों हादसों में पर्यटन सुविधाओं और सूचनाओं की कमी भी सबके सामने है। लारजी हादसे में डैम से पानी छोड़ने से पहले कोई वार्निगिं सिस्टम या सूचना पट्ट न होना भी दुर्घटना का कारण बना तो दूसरी ओर सिरमौर में भी 55 सीटर बड़ी बस कैसे सिंगल रोड पर चली गई, ये बड़ा सवाल है। क्या रेणुका से पांवटा के शार्टकट को पकड़ने से पहले पर्यटकों को ये जानकारी देने की कोई व्यवस्था थी कि वे इतनी बड़ी बस को वन-वे रोड पर ले जा सकते हैं या नहीं?
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हिमाचल को इस हादसों से सबक लेना होगा। हर साल ढाई करोड़ की पर्यटकों की आवभगत का दावा करने वाले हिमाचल में ऐसे हादसे पर्यटन के भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं। पर्यटन सीजन से पहले सभी प्रबंधों और व्यवस्थाओं की समीक्षा करने की जरूरत है। पहाड़ पर कौन सी सड़कें मैदानों से आने वाले पर्यटकों और चालकों के लिए ठीक हैं और कौन सी नहीं हैं, इसके सूचना पट्ट होने चाहिए।
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बड़ी बस के लिए नहीं थी ये सड़क
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने इस हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि वह सारी सूचनाएं मंगवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस सड़क पर हादसा हुआ, वह बड़ी बस के लिए नहीं थी। लगता है कि शार्टकट के चक्कर में ड्राइवर ने ये सड़क पकड़ ली। बाली ने कहा कि हिमाचल के पर्यटन के लिए ये हादसे ठीक नहीं हैं। राहत कार्यों के आदेश दे दिए गए हैं और सरकार प्रभावितों को हरसंभव सुविधा उपलब्ध करवाएगी।